MP में डेढ़ लाख शिक्षकों पर मंडराया छंटनी का खतरा! देनी होगी परीक्षा, फेल हुए तो जाएगी नौकरी

Edited By meena, Updated: 07 Mar, 2026 07:09 PM

one and a half lakh teachers in mp are facing the threat of retrench

मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की पात्रता की जांच के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है...

भोपाल: मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की पात्रता की जांच के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस परीक्षा में असफल रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेवा से बाहर किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। इस कदम के पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभाग सक्रिय

सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक भर्ती और पात्रता को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने यह प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है। विभाग का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि सभी शिक्षक निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करें। इसी उद्देश्य से पात्रता परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की योग्यता का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

शिक्षकों को जारी हुए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल ने हाल ही में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी। अगर कोई शिक्षक तय समय सीमा में टीईटी पास नहीं करता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है।

फेल होने पर नौकरी पर पड़ सकता है असर

यदि यह परीक्षा आयोजित होती है और कोई शिक्षक इसमें निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें सेवा समाप्ति या अन्य प्रशासनिक कदम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और विस्तृत दिशा-निर्देश विभाग की ओर से जारी किए जाने बाकी हैं।

शिक्षकों में बढ़ी चिंता

इस खबर के सामने आने के बाद राज्य के शिक्षकों में चिंता का माहौल है। कई शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अचानक इस तरह की परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं है। फिलहाल विभाग द्वारा संभावित परीक्षा की तैयारियों को लेकर चर्चा जारी है और आने वाले समय में इस पर आधिकारिक घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है।

कर्मचारी संगठनों का विरोध शुरु

शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ने लगी है। कहना है कि सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों को परीक्षा के आधार पर हटाना उचित नहीं है। संगठन सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी भी कर रहे हैं। उनका कहना कि कई शिक्षकों को पढ़ाई छोड़े 15 से 20 साल हो चुके हैं। ऐसे में उनके लिए यह परीक्षा पास करना बेहद कठिन होगा। हो सकता है कि कई शिक्षक परीक्षा में सफल नहीं हो पाएंगे और उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है।

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