बिलासपुर में रिकॉर्ड बारिश से जनजीवन ठप, एक महिला की मौत; CM साय ने राहत-बचाव कार्य तेज करने के दिए निर्देश

Edited By meena, Updated: 18 Jul, 2026 02:03 PM

normal life disrupted in bilaspur due to record rainfall one woman dead

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरुवार से जारी मूसलाधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। शहर के निचले इलाकों, रिहायशी कॉलोनियों, प्रमुख सड़कों और रेलवे यार्ड तक में जलभराव हो गया...

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरुवार से जारी मूसलाधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। शहर के निचले इलाकों, रिहायशी कॉलोनियों, प्रमुख सड़कों और रेलवे यार्ड तक में जलभराव हो गया, जबकि तेज बहाव में बहने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा सहित प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लगातार हुई वर्षा से शहर के कई हिस्सों में छह से आठ फीट तक पानी भर गया। जिन कॉलोनियों में पिछले दो से ढाई दशक में कभी जलभराव नहीं हुआ था, वहां भी इस बार घरों में पानी घुस गया। देवनंदन नगर फेस-1 एवं 2, गीतांजलि सिटी फेस-1 एवं 2, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा, जबड़ापारा समेत अनेक क्षेत्रों में लोग पूरी रात घरों से सामान बचाने में जुटे रहे। कई परिवारों को ग्राउंड फ्लोर छोड़कर पहली मंजिल पर शरण लेनी पड़ी। फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, सोफा सहित घरेलू सामान पानी में डूब गए, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। बारिश के कारण शहर के अरपापार, रायपुर रोड, सकरी तथा बाहरी कॉलोनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। हालात इतने बिगड़े कि एसडीआरएफ को देवनंदन नगर सहित आधा दर्जन से अधिक इलाकों में नाव उतारकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। बारिश थमने के बाद भी लोगों को घरों से पानी निकालने, कीचड़ साफ करने और क्षतिग्रस्त सामान संभालने में पूरा दिन लग गया। बारिश के बीच शुक्रवार सुबह लिंगियाडीह निवासी 65 वर्षीय प्रमिला बाई की नाले के तेज बहाव में बहने से मौत हो गई। उनका शव बाद में राजकिशोर नगर स्थित ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी की झाड़यिों में फंसा मिला।

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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमिला बाई शीला अपाटर्मेंट के पास स्थित उफनते नाले को पार करने का प्रयास कर रही थीं। आशंका है कि इसी दौरान उनका पैर फिसल गया अथवा वे तेज बहाव की चपेट में आ गईं। सरकंडा पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमाटर्म के लिए भेजते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। बारिश के 12 घंटे बाद भी सरकंडा क्षेत्र के शिवम होम्स, चौबे कॉलोनी, बंधवापारा सहित कई इलाकों में पानी नहीं उतर सका। दूसरी ओर जलभराव के चलते एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद रखने से पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया और लोगों को बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ा। नगर निगम द्वारा पिछले तीन वर्षों में जलभराव रोकने के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न इलाकों में बड़े नालों का निर्माण कराया गया था, लेकिन इस बार भी अनेक क्षेत्रों में स्थिति नहीं सुधर सकी। बंधवापारा में लगभग पांच करोड़ रुपये से बने नाले के बावजूद आसपास की कॉलोनियां डूब गईं। पुराना दीप होटल से जवाली नाले तक करीब सात करोड़ रुपये की लागत से 20 फीट चौड़ा नाला बनाए जाने के बाद भी लिंक रोड और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र जलमग्न रहे क्योंकि बीच का पुराना छह फीट चौड़ा नाला यथावत रहा। तालापारा और बालमुकुंद स्कूल से तैयबा चौक तक लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बने नाले भी जलनिकासी सुनिश्चित नहीं कर सके। वहीं तिफरा स्थित यदुनंदन कॉलोनी में 3.27 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे नाले का अंतिम हिस्सा अधूरा रहने से वहां भी जलभराव बना रहा। लगातार बारिश से बिलासपुर-कोरबा और बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, मस्तूरी तिराहा, पारा घाट टोल प्लाजा, दुबट्टा मोड़, भैंसो पुल, कुटीघाट तथा कोसा माना डेरा-मल्हार एनीकट सहित कई स्थानों पर आवागमन बाधित हो गया। कुटीघाट में लीलागर नदी पुल के ऊपर तीन से चार फीट पानी बहता रहा। बिलासपुर रेलवे स्टेशन और याडर् में ट्रैक डूबने से सात ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं तथा चार ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया। कुछ ट्रेनें चांपा और दाधापारा से वापस लौटीं, जबकि एक मेमू ट्रेन को बीच रास्ते में ही समाप्त करना पड़ा। विद्युत वितरण कंपनी के ईडी एके अम्बस्थ के अनुसार शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज सब-स्टेशन में पानी भरने के साथ 17 ट्रांसफार्मर जलमग्न हो गए, जिसके चलते सुरक्षा की द्दष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बंद रखी गई। जिला प्रशासन, नगर निगम और एसडीआरएफ ने देर रात से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

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कलेक्टर संजय अग्रवाल और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने स्वयं मोर्चा संभाला। होमगार्ड के जिला कमांडेंट दीपांकर नाथ के नेतृत्व में संयुक्त टीमों ने चौबे कॉलोनी, बंधवापारा, खमतराई, बहतराई, सिरगिट्टी, जोरापारा, विजयापुरम, मंगला, सकरी, व्यापार विहार, कुदुदंड, तोरवा, तारबाहर, तिफरा और नेहरू नगर सहित अनेक इलाकों में जेसीबी, जेट सक्शन मशीन और पंपों के जरिए जलनिकासी कराई। एसडीआरएफ ने जगदंबा कॉलोनी, बंधवापारा, श्रीकांत वर्मा मार्ग, मित्र विहार, गीतांजलि सिटी, मंगला, देवनंदन नगर, विजयापुरम, चौबे कॉलोनी और रिस्दा मल्हार सहित विभिन्न क्षेत्रों से कुल लगभग 204 लोगों को सुरक्षित निकाला। जगदंबा कॉलोनी में जलभराव के बीच एक मरीज तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाया गया, जबकि चौबे कॉलोनी में पांच फीट पानी में फंसी बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। नगर निगम ने जिन परिवारों के घरों में भोजन नहीं बन सका, उन्हें 1700 फूड पैकेट वितरित किए। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा के नेतृत्व में रेलवे, बंधवापारा और फोकटपारा क्षेत्रों में लगभग 1200 फूड पैकेट तथा चाय-नाश्ता भी वितरित किया गया। वार्ड-62 शास्त्री नगर के पूर्व पार्षद राजेश शुक्ला ने कपिल नगर, बंगाली पारा, गुरु विहार और रुद्र विहार कॉलोनी में नालियों की सफाई कर जलनिकासी का कार्य कराया। शहर विधायक अमर अग्रवाल ने प्रशासन को जलनिकासी, स्वच्छता, पेयजल और बिजली व्यवस्था शीघ्र बहाल करने तथा सिम्स एवं जिला अस्पताल को संभावित मौसमी बीमारियों के मद्देनजर सतर्क रहने के निर्देश दिए। वहीं पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने आरोप लगाया कि बारिश ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के दावों की पोल खोल दी है तथा कई क्षेत्रों में जलभराव के बावजूद जनप्रतिनिधि नजर नहीं आए।

मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2021 में 24 घंटे के दौरान 123.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी, जबकि इस बार 415.6 मिमी बारिश ने पूर्व के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिले में सीपत और तखतपुर में 110.2-110.2 मिमी, मस्तूरी में 96.2 मिमी तथा सकरी में 95.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बिलासपुर संभाग के जांजगीर में 170 मिमी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 75 मिमी, मुंगेली में 58.8 मिमी, कोरबा में 47.4 मिमी, सक्ती में 38.5 मिमी, रायगढ़ में 34 मिमी और जीपीएम में 33.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

इस बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में अतिवृष्टि और जलभराव की स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज कहा, 'जिला प्रशासन पूरी सतकर्ता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।'

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, 'राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।'

उन्होंने कहा, 'प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।' मौसम विभाग ने 18 जुलाई को भी बिलासपुर संभाग और आसपास के जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतकर् रहने की सलाह दी है। 

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