प्रदेश के इन 50 अफसरों पर कभी भी गिर सकती है गाज, IAS,IPS,IFS लंबे समय से राडार पर, बस ये फंसा है पेंच

Edited By Desh Raj, Updated: 01 Mar, 2026 05:34 PM

officers in chhattisgarh accused of corruption under investigation

छतीसगढ़ में बड़े-बडे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप है लेकिन जांच लंबे समय से लंबित है।इस कड़ी में   करीब 50 अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप और IAS, IPS से लेकर IFS अफसर तक जांच के दायरे में है। लेकिन कई मामलों में अनुमति लंबित है और जांच नहीं...

(रायपुर): छतीसगढ़ में बड़े-बडे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप है लेकिन जांच लंबे समय से लंबित है।इस कड़ी में   करीब 50 अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप और IAS, IPS से लेकर IFS अफसर तक जांच के दायरे में है। लेकिन कई मामलों में अनुमति लंबित है और जांच नहीं हो पा रही है। मामला जैसे के तैसे पडे है।

आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आए करीब 50 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच प्रस्ताव लंबित पड़ी हैं। हालांकि EOW और ACB  ने कई मामलों में राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी है,  लेकिन 9 अधिकारियों के खिलाफ अब तक अनुमति ही नहीं मिल पाई है जिसके चलते  जांच एजेंसियों आगे की कार्रवाई न करने पर विवश हैं। उन्हें अनुमति मिलने का इंतजार है। ईओडब्ल्यू और एसीबी ने जिन मामलों को लेकर उन अधिकारियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की है, वे कई महीनों से लंबित हैं।

जिन अफसरों पर आरोप हैं-

IAS इफ्फत आरा- पाठ्यपुस्तक निगम में कागज खरीदी और परिवहन निविदा में अनियमितता

IAS संजय अलंग- समाज कल्याण विभाग में निराश्रित राशि वितरण में गड़बड़ी, जो 29 जनवरी 2025 से लंबित है।

IAS सुधाकर खलखो-  माटीकला बोर्ड में शासकीय धन के दुरुपयोग के आरोप में जांच लंबित है

वहीं अगर IFS अधिकारियों की बात करें तो इनकी फेरहिस्त भी लंबी है । अनूप भल्ला, रमेश चंद्र दुग्गा, केके खेलवार, लक्ष्मण सिंह, चूड़ामणि और एसपी मशीह वो अधिकारी हैं जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के साथ ही  गबन से जुड़े मामलों में  अनुमति का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है।

प्रदेश में तहलका मचाने वाले कोयला घोटाले में वैसे आईएएस समीर बिश्नोई के खिलाफ जांच स्वीकृति के बाद दायरा बढ़ा है। इसके साथ ह किरण कौशल, भीम सिंह और जय प्रकाश मौर्य जैसे नाम भी जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं। शराब घोटाले में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, अनिल टुटेजा और निरंजन दास पहले से ही जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के सीजीएमएससी निविदा प्रकरण में चंद्रकांत वर्मा, अभिजीत सिंह, सीआर प्रसन्ना और कार्तिकेय गोयल के नाम सामने आए हैं। जबकि महादेव एप सट्टा घोटाले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बहुत ही संगीन आरोप हैं। इसमें आनंद छाबड़ा, अजय यादव, आरिफ शेख, प्रशांत अग्रवाल, अभिषेक पल्लव और ओपी पाल पर सट्टा प्रमोटरों को संरक्षण देने के बड़े आरोप हैं। वन विभाग में IFS अरुण प्रसाद, एके बोआज और विवेक आचार्य समेत कई अफसरों के खिलाफ जांच की अनुमति फिलहाल लंबित है।

लिहाजा इतने लंबे समय से स्वीकृतियां लंबित है जिससे विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।लिहाजा लंबित स्वीकृतियां मिलते ही इन अधिकारियों के खिलाफ जांच चलेगी और इन पर तलवार भी लटकेगी।  

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