पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सुप्रीम कोर्ट से राहत, याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति

Edited By Vandana Khosla, Updated: 29 Jul, 2026 04:38 PM

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भोपाल/नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश कांग्रेस के अयोग्य ठहराए गए विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार को सहमति जताई। इस याचिका में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें धोखाधड़ी के एक मामले...

भोपाल/नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश कांग्रेस के अयोग्य ठहराए गए विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार को सहमति जताई। इस याचिका में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें धोखाधड़ी के एक मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। यह मामला 1998 से 2011 के बीच अवैध ब्याज भुगतान हासिल करने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी से जुड़ा है।

निचली अदालत ने दो अप्रैल को इस मामले में जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के बाद, उच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल को इस मामले में पूर्व विधायक को सुनाई गई तीन साल की सजा पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि 10 जुलाई को इस मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

दोषसिद्धि के बाद भारती को राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने भारती के निर्वाचन क्षेत्र दतिया के लिए 30 जुलाई को उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी कर दी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई थी। उच्च न्यायालय के 10 जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली भारती की याचिका बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।

पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई और प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि याचिका को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाये। निचली अदालत ने एक अप्रैल को भारती को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दोषी ठहराया था।

मध्यप्रदेश के दतिया से जुड़े इस मामले को शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। यह फैसला बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयास किए जाने के दावे के मद्देनजर लिया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारती की दिवंगत मां सावित्री ने 24 अगस्त 1998 को दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में परिवार द्वारा संचालित एक ट्रस्ट के नाम पर तीन साल की सावधि जमा (एफडी) के रूप में 10 लाख रुपये जमा किए थे। इस जमा पर सालाना 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर तय की गई थी। अभियोजन ने कहा कि आरोपियों ने बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर तय अवधि के बाद भी ऊंची ब्याज दर का भुगतान जारी रखने के लिए साजिश रची थी।

 

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