Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Mar, 2026 06:26 PM

जिले की हुनरमंद महिलाएं सफलता के क्षितिज छू रही है और अपने आत्मविश्वास एवं हौसले से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
राजनांदगांव। जिले की हुनरमंद महिलाएं सफलता के क्षितिज छू रही है और अपने आत्मविश्वास एवं हौसले से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से उन्हें एक राह और ताकत मिली। जिले में संचालित राज बिहान रसोई शहर में परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लोकप्रिय ठिहा है। इसकी संचालक प्रतिज्ञा महिला स्वसहायता समूह की लखपति दीदी श्रीमती ज्ञानेश्वरी निषाद ने कहा कि महिलाएं यदि ठान ले तो कोई भी कार्य कठिन नहीं है, सोचे नहीं थे कि छोटे से स्तर पर प्रारंभ किया गया यह व्यवसाय इतना बढ़ जायेगा। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर होने से उनकी अपनी अलग एक पहचान बनी है।
उन्होंने बताया कि राज बिहान रसोई में खुबसूरत सजावट किया गया है। यहां छत्तीसगढ़ पकवानों के लिए निरंतर आर्डर मिल रहे हैं, जिससे कार्य में मन लग गया है। समय पर आर्डर पूरा करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सभी महिलाएं एक साथ मिलकर मेहनत से कार्य कर रही हंै। राज बिहान रसोई में विभिन्न तरह के छत्तीसगढ़ी व्यंजन चीला, बड़ा, फरा, चौसेला, मुगोड़ी, साबुदाना बड़ा, अइरसा, ठेठरी, खुर्मी, बालुशाही जैसे स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी पकवान उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 15 हजार रूपए से 18 हजार रूपए तक की आमदनी प्राप्त हो रही है। माह में लगभग 35 हजार से 40 हजार रूपए मासिक आमदनी हो रही है। कलेक्टोरेट परिसर में स्थापित राज बिहान रसोई में जनमानस जायकेदार व्यंजनों का लुफ्त उठाने प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। ज्ञानेश्वरी निषाद ने बताया कि समूह से जुडऩे के पहले वे खेती-किसानी के कार्यों में परिवार की मदद करती थी और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। अपनी आय में बढ़ोत्तरी के लिए वे गांव में सामाजिक कार्यों में भोजन बनाने का कार्य मजदूरी में करती थी।
कार्य में वृद्धि होने से उन्हें आर्डर प्राप्त होने लगे और उन्होंने बिहान से जुड़कर ऋण लेकर यह व्यवसाय प्रारंभ किया। उन्होंने बताया उनकी टीम में शामिल प्रत्येक सदस्य लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। भविष्य में उनका यह सपना है कि टीम के सभी सदस्य और अधिक आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हो और राज बिहान रसोई के और भी ब्रांच हो। उन्होंने बताया कि बचत होने पर अपने घर के लिए मिक्सी एवं फ्रिज खरीदा है और कुछ दिनों पहले 50 हजार रूपए की राशि से अपने लिए सोने के झुमके खरीदे हैं।
ज्ञानेश्वरी निषाद ने बताया कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से उन्हें बहुत मदद मिली। उत्साहवर्धन हेतु स्थानीय स्तर के शासकीय एवं अशासकीय मेला एवं मड़ई में कैटरिंग कार्य हेतु भेजा गया। उनकी उत्सुकता एवं रूचि को देखते हुए सरस मेला गुडग़ांव, दिल्ली, गुरूग्राम, कलकत्ता, केरल, रायपुर, भिलाई भेजा गया। प्रत्येक सरस मेला में अपनी टीम के साथ कार्य करते हुए लगभग एक-एक लाख रूपए से अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।