MP बनेगा स्पेस टेक का हब! SpaceTech Policy 2026 से बदलेगी तस्वीर, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

Edited By Himansh sharma, Updated: 22 Mar, 2026 05:31 PM

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स्पेसटेक सेक्टर में योग्य मानव संसाधन तैयार करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 लागू की है। यह नीति स्पेसटेक नवाचार, विनिर्माण, अनुसंधान और तकनीक आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देकर प्रदेश को भारत की तेजी से विकसित हो रही अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है और भारत इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी मजबूत औद्योगिक संरचना, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, डिफेंस कॉरिडोर और उभरते टेक्नोलॉजी इको सिस्टम के कारण स्पेसटेक निवेश के लिए एक अनुकूल और आकर्षक गंतव्य बन रहा है। यह नीति प्रदेश की वैज्ञानिक और खगोलीय विरासत को भविष्य उन्मुख तकनीकी नेतृत्व में बदलने का एक दूरदर्शी प्रयास है, जो युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करेगी और प्रदेश को स्पेसटेक सेक्टर में नई पहचान दिलाएगी। 

स्पेसटेक इको सिस्टम के समग्र विकास का विजन

स्पेसटेक नीति-2026 अंतरिक्ष क्षेत्र के अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सभी क्षेत्रों के विकास का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।इसमें सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल कंपोनेंट निर्माण, प्रणोदन प्रणाली, एवियोनिक्स, उन्नत सामग्री, असेंबली-इंटीग्रेशन-टेस्टिंग, मिशन संचालन, ग्राउंड स्टेशन, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।नीति में आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा और युवाओं को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्पेसटेक क्षेत्र के लिए तैयार किया जाएगा।

अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा नया आधार

नीति में स्पेसटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जहां अनुसंधान, नवाचार, प्रोटोटाइप विकास और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्मालसेट डिजिटल ट्विन लैब एण्ड स्पेस इनोवेशन सैंडबोक्स जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। उज्जैन में खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर प्रदेश की वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा।

स्टार्ट-अप और उद्योगों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन

नीति में स्टार्टअप्स को 75 लाख रुपये तक आइडिया-टू-प्रोटोटाइप अनुदान, एक करोड़ रुपये तक टेक्नोलॉजी अधिग्रहण सहायता और 200 करोड़ रुपये का रणनीतिक फंड निवेश, राज्य भागीदारी कोष से उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही एक पेटेंट पर 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, परीक्षण सुविधाओं के लिए 1 करोड़ रुपये तक सहायता और इसरो, इन-स्पेस और आईएसओ प्रमाणन के लिए 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 10 लाख रूपये) का प्रावधान किया गया है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव और इनक्यूबेशन सुविधाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

कौशल विकास से तैयार होगा भविष्य का कार्यबल

स्पेसटेक सेक्टर में योग्य मानव संसाधन तैयार करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके लिए 20 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। छात्रों को 6 माह तक 10 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड के साथ इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे। साथ ही कर्मचारियों के कौशल उन्नयन के लिए 50 हजार रुपये तक सहायता और शोधकर्ताओं के लिए स्पेसटेक फेलोशिप का भी प्रावधान किया गया है।

विश्वस्तरीय अधोसंरचना का होगा विकास

नीति में स्पेसटेक उद्योगों को 40 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान (अधिकतम 150 करोड़ रुपये) दिया जाएगा। महिला उद्यमियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। स्पेस सिस्टम एवं एप्लीकेशन पार्क, परीक्षण प्रयोगशालाएं, क्लीन रूम और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग आधारित डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे। परीक्षण सुविधाओं के लिए 15 करोड़ रुपये तक अनुदान और स्टार्ट-अप एवं एमएसएमई को परीक्षण लागत पर 30 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी।

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिलेगा बढ़ावा

स्पेसटेक के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए ‘अंतरिक्ष विहार’ स्पेस एक्सप्लोरेशन पार्क स्थापित किया जाएगा। ‘मिशन कल्पना’ में  स्कूल विद्यार्थियों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसरो के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका) में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सहयोग दिया जाएगा और चयनित विद्यार्थियों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

निवेशकों के लिए सुगम प्रक्रियाएं

नीति के क्रियान्वयन के लिए एमपीएमईडीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। निवेशकों और स्टार्टअप्स को सिंगल विंडो क्लीयरेंस, ऑनलाइन पंजीयन और सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेसटेक नीति-2026 प्रदेश में निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को नई गति देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह नीति मध्यप्रदेश को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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