MP में निगम मंडल अध्यक्षों की सूची तैयार! CM मोहन, शिवराज या सिंधिया किसका दबदबा बरकरार! जानें

Edited By meena, Updated: 18 Mar, 2026 02:46 PM

list of corporation and board chairpersons in mp ready

मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक सूची लगभग तैयार मानी जा रही है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है...

भोपाल : मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक सूची लगभग तैयार मानी जा रही है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। यह नियुक्तियां सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने का भी बड़ा माध्यम होती हैं, जिसमें क्षेत्रीय, जातीय और संगठनात्मक समीकरणों का खास ध्यान रखा जाता है।

संगठन महामंत्री पद की रेस में ये चेहरे

विमल गुप्ता, राजमोहन सिंह, मिथिलेश महेश्वरी का नाम महामंत्री दौड़ में शामिल है।

निगम मंडल और आयोग में इन्हें मिल सकती है जगह

अंचल सोनकर, संजय शुक्ला और पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह। इसके अलावा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले नेताओं को भी मौका मिल सकता था।

इन्हें मिल सकता है मौका

यदि पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य राज्यसभा नहीं जाते हैं तो उन्हें मौका मिल सकता है। पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया, अरविंद भदौरिया, उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल, इमरती देवी, रामनिवास रावत का नाम निकल सामने आ रहा है। वहीं संगठन में सक्रिय नेताओं को भी एडजस्ट करने की रणनीति बन रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की भूमिका पर नजरें

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका मुख्यमंत्री Mohan Yadav की मानी जा रही है। माना जा रहा है कि वे अपनी टीम को मजबूत करने और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दे सकते हैं। साथ ही संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रखना भी उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।

शिवराज और सिंधिया खेमे की ताकत की परीक्षा

पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan और केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। दोनों नेताओं के समर्थकों को सूची में कितनी जगह मिलती है, यह देखना दिलचस्प होगा। शिवराज सिंह चौहान का लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रहा है, वहीं सिंधिया गुट भी अपने समर्थकों को समायोजित करने की कोशिश में है।

संतुलन साधना होगा सबसे बड़ी कसौटी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी को न केवल अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए भी मजबूत आधार तैयार करना है। ऐसे में यह सूची कई संदेश दे सकती है—किसे प्राथमिकता मिली, किसे नजरअंदाज किया गया और किस नेता का प्रभाव कितना कायम है। अब सभी की नजरें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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