Edited By Desh Raj, Updated: 19 Mar, 2026 10:53 PM

रायसेन में वन विभाग में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की मुखिया द्वारा यह दावा किया गया कि जिस वनरक्षक को सस्पेंड किया गया था, उसे उसी स्थान पर पुनः पदस्थ नहीं किया गया है।
रायसेन ( शिवलाल यादव): रायसेन में वन विभाग में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की मुखिया द्वारा यह दावा किया गया कि जिस वनरक्षक को सस्पेंड किया गया था, उसे उसी स्थान पर पुनः पदस्थ नहीं किया गया है। लेकिन जांच पड़ताल में सामने आया है कि हकीकत कुछ और ही है। काले हिरण (ब्लैकबक) प्रकरण में सस्पेंड किए गए वनरक्षक जुबेर खान को महज 10 दिनों के भीतर ही नौकरी से बहाल कर दिया गया है।
काले हिरण के शिकार के मामले में सस्पेंड किया गया था वनरक्षक जुबेर खान
सूत्रों के अनुसार, काले हिरण (ब्लैकबक) प्रकरण में सस्पेंड किए गए वनरक्षक जुबेर खान को महज 10 दिनों के भीतर ही नौकरी से बहाल कर फिर से उसी स्थान (बीट कॉलोनी/गेहलपुर क्षेत्र) में पदस्थ कर दिया गया। इतना ही नहीं, मामले में अब तक विभागीय जांच शुरू नहीं किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इतना संवेदनशील दुर्लभ वन्य प्राणी काले हिरण के शिकार का मामला उजागर होने के बावजूद कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। विभागीय जांच प्रस्तावित होने के बावजूद उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। जिससे पूरे मामले पर पर्दा डालने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि काले हिरण जैसे वन्यजीव से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच जरूरी होती है।लेकिन इस मामले में उल्टा आरोपी वनरक्षक को ही राहत मिलती नजर आ रही है।
अब ये सवाल उठे
क्या विभागीय जांच जानबूझकर रोकी गई?
सस्पेंड कर्मचारी को इतनी जल्दी बहाल करने के पीछे क्या कारण हैं?
क्या यह विभागीय लापरवाही है या अंदरूनी सांठगांठ?
प्रतिभा शुक्ला डीएफओ सामान्य ने क्या बोला?
वनरक्षक जुबेर खान की जांच पड़ताल में क्लीन चिट दी गई है। इस फॉरेस्ट गार्ड द्वारा सागौन लकड़ी तस्करी वन्य प्राणियों के अवैध शिकार के प्रकरणों पर नियंत्रण कर रखा है।
लिहाजा मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।