बागेश्वर धाम में दर्दनाक हादसा: गड्ढे में मृत मिला 6 साल का मासूम, खेलते-खेलते जा गिरा था; परिजनों में मची चीख-पुकार

Edited By Vandana Khosla, Updated: 08 Apr, 2026 03:43 PM

tragic accident in bageshwar dham

छतरपुर: छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम क्षेत्र में बुधवार को एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है। जहां गंदे पानी से भरे खुले गड्ढे में डूबने से 6 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। मृतक की पहचान दिव्यांश शर्मा (6 वर्ष), पिता प्रवीण कुमार, निवासी रेवाड़ी (हरियाणा)...

छतरपुर: छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम क्षेत्र में बुधवार को एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है। जहां गंदे पानी से भरे खुले गड्ढे में डूबने से 6 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। मृतक की पहचान दिव्यांश शर्मा (6 वर्ष), पिता प्रवीण कुमार, निवासी रेवाड़ी (हरियाणा) के रूप में हुई है।

बच्चे का झाड़ा लगवाने आया था परिवार
जानकारी के अनुसार, दिव्यांश का परिवार बच्चे के बीमार होने पर उसे झाड़ा लगवाने के लिए बागेश्वर धाम आया हुआ था। इसी दौरान दोपहर करीब 11 से 12 बजे के बीच बच्चा खेलते-खेलते पास ही एक ढाबे के पीछे बने गंदे पानी के गड्ढे में जा गिरा। घटना के समय परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगी।

गड्ढे में मृत मिला 6 साल का मासूम
कुछ देर बाद जब बच्चा नजर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास मौजूद लोगों की मदद से खोजबीन की गई। इसी दौरान ढाबे के पीछे बने गड्ढे में बच्चे का शव उतरता हुआ दिखाई दिया। परिजन और स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और इलाज के लिए जिला अस्पताल छतरपुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया गया है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण लापरवाही और खुले गड्ढे को माना जा रहा है।

खुले गड्ढे बने जानलेवा, जिम्मेदारों पर सवाल
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में खुले पड़े गड्ढों और असुरक्षित स्थानों की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ढाबों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास इस तरह के गड्ढे लंबे समय से खुले पड़े हैं, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

यह हादसा प्रशासन और संबंधित लोगों की लापरवाही की पोल खोलता है। यदि समय रहते ऐसे खतरनाक गड्ढों को ढंका या सुरक्षित किया जाता, तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।


 

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