कांग्रेस ने सिंधिया को महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के बहाने घेरा, बोले- खूब लड़ी मर्दानी वो तो

Edited By meena, Updated: 17 Jun, 2020 12:08 PM

congress besieges scindia on the pretext of queen lakshmibai s sacrifice day

ग्वालियर में रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस के बहाने कांग्रेस ने सिंधिया को घेरने की कोशिश की है लिहाजा कांग्रेस ने जय विलास पैलेस के बाहर लगे एक साइन बोर्ड पर सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता वाली पंक्तियों वाले होर्डिंग्स लगाए हैं। इन पर बड़े बड़े...

ग्वालियर(अंकुर जैन): ग्वालियर में रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस के बहाने कांग्रेस ने सिंधिया को घेरने की कोशिश की है लिहाजा कांग्रेस ने जय विलास पैलेस के बाहर लगे एक साइन बोर्ड पर सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता वाली पंक्तियों वाले होर्डिंग्स लगाए हैं। इन पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा गया है खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने रानी लक्ष्मीबाई के बहाने सिंधिया को घेरने की कोशिश की है।

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इससे पहले बीजेपी के नेता जयभान सिंह पवैया रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस को बड़े स्तर पर मनाते चले आए हैं और कांग्रेस सिर्फ खानापूर्ति कर बलिदान दिवस पर इतिश्री कर लेती थी लेकिन अब जब सिंधिया कांग्रेस में नहीं है और उपचुनाव में सिंधिया उनके खिलाफ होंगे तो कांग्रेस ने भी सिंधिया के खिलाफ रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस के बहाने ताल ठोक दी है। जिसका असर साफ तौर पर ग्वालियर में दिखाई दे रहा है।

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जय विलास पैलेस के बाहर नदी गेट पर एंट्री पॉइंट पर लगाए गए बोर्डिंग से कांग्रेस ने एकजुटता की भी संदेश देने की कोशिश की है। आज हार्डिंग में अपने सभी नेता को तरजीह दी गई हैं, कांग्रेस ने पहली बार अपने दलित नेता फूल सिंह बरैया को अपनी होर्डिंग में जगह दी है।

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आपको बता दें कि इससे पहले जब सिंधिया कांग्रेस में थे तो बीजेपी ने सिंधिया पर यह आरोप लगाते हुए हमेशी घेरा है कि “महारानी लक्ष्मीबाई अग्रेजों से संघर्ष करते हुए ग्वालियर पहुंच गई थीं, लेकिन अपने लोगों ने अग्रेंजों का साथ दिया, ग्वालियर की सिंधिया रियासत में उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया गया, तोपें लगा दी गईं, और उन दिनों आजादी के सेनानियों को तोपों का सामना करना पड़ा, जिससे रानी लक्ष्मीबाई को बलिदान देना पड़ा था।” वहीं राज्य सरकार के मंत्री और सिंधिया राजघराने के प्रखर विरोधी के तौर पर पहचाने जाने वाले जयभान सिंह पवैया भी महारानी का बलिदान दिवस शुरु से मनाते चले आए हैं।

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