12वीं के छात्र ने बिना वकील और वकालत लड़ी हक की लड़ाई,10 मिनट मांगे और पलट दिया फैसला,सुप्रीम कोर्ट दलीलें सुन हैरान

Edited By Desh Raj, Updated: 16 Feb, 2026 04:39 PM

a 12th grade student fought for his rights without a lawyer or advocacy

मध्य प्रदेश के एक युवा ने वो कर दिखाया है जो चर्चा का विषय बन गया है। 12वीं के छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी दलीलें दीं कि सारा मामला ही पलट गया और फैसला 12वीं के छात्र के हक में आया। खास बात ये है कि छात्र अथर्व ने बिना वकील के अपना केस लड़ा और...

(जबलपुर): मध्य प्रदेश के एक युवा ने वो कर दिखाया है जो चर्चा का विषय बन गया है। 12वीं के छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी दलीलें दीं कि सारा मामला ही पलट गया और फैसला 12वीं के छात्र के हक में आया। खास बात ये है कि छात्र अथर्व ने बिना वकील के अपना केस लड़ा और सुप्रीम कोर्ट के पास अपना ऐसे रखा कि कोर्ट 12वीं के छात्र के पक्ष में फैसला सुनाने को मजबूर हो गया। मामला MBBS के एडमिशन के जुड़ा है। छात्र ने बिना वकील के ये केस जीता है,इसलिए पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। 12वीं के छात्र ने 10 मिनट में बिना वकील खुद ही कोर्ट में जो फैक्टस रखे,सुप्रीम कोर्ट उसके हक में फैसला सुनाने को तैयार हो गया।

12वीं कक्षा के 19 साल के छात्र अथर्व की हो रही चर्चा

दरअसल जबलपुर में रहने वाले 12वीं कक्षा के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने पिछले दिनों देश के सर्वोच्च कोर्ट में सिर्फ 10 मिनट ऐसी दलीलें दी कि फैसला ही उसके हक मे आ गया। खास बात है कि अथर्व ने बिना किसी वकालत डिग्री और वकील के ही अपना केस लड़ा। जानकारी के मुताबिक छात्र के पास वकील को फीस देने के पैसे नहीं थे। उसने सिर्फ कानूनी आधिकारों की किताबों से जानकारी लेकर कोर्ट में कसे लड़ा।

क्या था मामला?

तो इस केस के बारे में आपको बताते हैं कि अथर्व ने पिछले दिनों NEET का एग्जाम दिया था, जिसमें 530 नंबर प्राप्त किए थे। उसने EWS कोटे में MBBS सीट का दावा किया था। लेकिन उसको प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिली। इसके पीछे तर्क दिया गया कि  राज्य सरकार की अधिसूचना में देरी से जारी होने के कारण EWS कोटे का लाभ नहीं दिया जा सकता ।

अर्थव अपने सपने के लिए जी रहा था, लड़ाई लड़ने का किया फैसला

अथर्व ने इस मामले को कोर्ट में लड़ने का फैसला किया। लेकिन समस्या ये थी कि अथर्व के पास वकीलों को देने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए उसने कानूनी किताबें पड़कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाइकोर्ट में उसकी नहीं सुनी गई।अथर्व ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

अथर्व ने जनवरी 2025 में फिर नई याचिका दाखिल की। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच में अथर्व ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि- मुझे 10 मिनट दीजिए, मैं साबित कर दूंगा। अथर्व पूरी तैयारी करके गया था और कहा  'पॉलिसी की देरी का दोष योग्य छात्रों पर नहीं डाला जाना चाहिए।' करीब 10 मिनट मे ही अथर्व ने वो तथ्य और दलीलें कोर्ट के सामने पेश कर दीं कि कोर्ट उनकी तारीफ करने को मजबूर हो गया और अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रोविजनल MBBS एडमिशन का आदेश दे दिया।

2 बार नीट परीक्षा पास कर चुका है अथर्व

10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अथर्व की दलीलें सुनने के बाद उसके पक्ष में फैसला सुनाया। नेशनल मेडिकल कमीशन और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि, 7 दिन में छात्र को कॉलेज आवंटित करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, याचिकाकर्ता EWS वर्ग का युवा लड़का है और 2 बार नीट परीक्षा भी पास की है। वो अपने हालात की वजह से एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन नहीं ले पाया। लिहाजा मध्य प्रदेश के जबलपुर का ये लड़का अपनी इस कामयाबी और बिन वकीलों केस लडने की वजह से काफी चर्चा में है।

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