Edited By Desh Raj, Updated: 16 Apr, 2026 06:58 PM

देश की संसद और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। गुरुवार को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है
(ग्वालियर): देश की संसद और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। गुरुवार को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है ताकि यह आरक्षण साल 2029 में होने वाले आम चुनाव में लागू किया जा सके।
कांग्रेस महापौर शोभा सिकरवार और उनके पति कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार में रार
लेकिन इसी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर ग्वालियर में सियासी संग्राम देखने को मिल रहा है। यहां कांग्रेस विधायक और महापौर इसको लेकर आमने सामने आ गए है। दिलचस्प बात है कि विरोध की ये तलवारें दोनों पति-पत्नी के बीच खींची है । जहां कांग्रेस महापौर शोभा सिकरवार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही हैं वहीं उनके पति कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार इसे राजनीति करार दे रहे हैं । इस तरह इस अधिनियम पर कांग्रेस महापौर पत्नी और कांग्रेस विधायक पति में ही बहसबाजी शुरु हो गई है।
शोभा सिकरवार बता रहीं ऐतिहासिक कदम
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिये 33 फीसदी आरक्षण महिलाओं को मिलेगा। इसको लेकर ग्वालियर महापौर शोभा सिकरवार इसके समर्थन में आते हुए इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। पीएम मोदी के इस कदम को स्वागत किया है।
सतीश सिकरवार को रास नहीं आ रहा अधिनियम
वहीं शोभा शिकरवार के पति और कांग्रेस विधायक डॉ सतीश सिकरवार पत्नी की सोच से सहमत नहीं है। सतीश सिकरवार का कहना है कि यह मोदी सरकार ने यह कदम महिलाओं को आरक्षण देने के नहीं है, बल्कि परिसीमन के लिए लाया गया है। बीजेपी इसको लेकर बहुत जल्दबाजी में है।
उनका कहना है कि अभी जनगणना चल रही है, एक ओर महिलाओं को आरक्षण देने की बात मोदी सरकार कर रही है, तो दूसरी ओर परिसीमन के जरिए लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ना चाहती है। लिहाजा इस विधेयक को लेकर मेयर पत्नी औऱ विधायक पति के बीच सहमति नहीं बन पा रही है और एक –दूसरे की सोच के विपरीत खड़े नजर आ रहे हैं।