Edited By Desh Raj, Updated: 15 Apr, 2026 04:16 PM

केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों को जो तीन ड्राफ़्ट बिल भेजे हैं उनमें दो बड़े ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित हैं। पहला है लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना और दूसरा है संसद की लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के...
(भोपाल): केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों को जो तीन ड्राफ़्ट बिल भेजे हैं उनमें दो बड़े ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित हैं। पहला है लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना और दूसरा है संसद की लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना। यह एक बड़ा कदम है।
आपको बता दें कि संसद के विशेष सत्र में पेश होने वाले महिला आरक्षण और परिसीमन बिल से मध्य प्रदेश के चुनावी समीकरणों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा और बहुत कुछ बदल जाएगा। अगर ऐसा होता है तो राज्य में विधानसभा सीटें 345 और लोकसभा सीटें 43 होने का अनुमान जताया जा रहा है। इसमें महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर बढ़ेगी।
दरअसल इससे मध्य प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो लंबे समय तक राजनीति को की दिशा ही बदल देगा। कल यानी की वीरवार 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश होने जा रहा है। इसके लागू होने से मध्य प्रदेश में न केवल महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में जबरदस्त तरीके से बढ़ोतरी हो जाएगी।
ड्राफ़्ट बिलों के पारित होने से मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या 230 से 345 किए जाने का प्लान है। इसमें महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी। जाहिर सी बात है कि सीटों की संख्या बढ़ने के साथ सरकार बनाने के आंकड़े में भी बदलाव आएगा। फिर राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। ये बदलाव दलो को चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा।
कैबिनेट संख्या में भी होगा विस्तार
इस परिसीमन का असर सदन की सीटों से लेकर कैबिनेट मंत्रियों की संख्या पर भी पड़ेगा। प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 50 से ऊपर चली जाएगी। वहीं लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से 43 करने के प्रस्ताव से भी बड़ा बदलाव होगा। महिला सांसदों की संख्या 6 से बढ़कर 14 होने की संभावना है। लिहाजा अगर ये तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं, तो 2029 के आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ़ हो सकता है और फिर राजनीति में भी बड़ा बदलाव संभव है।
ये 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को भविष्य में होने वाली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था।