धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 : छत्तीसगढ़ में महिलाओं व नाबालिगों के धर्मांतरण पर 20 साल तक की सजा

Edited By meena, Updated: 19 Mar, 2026 08:12 PM

freedom of religion bill 2026 passed in the legislative assembly up to 20 years

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026” पेश कर पारित कर दिया गया। इसे प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में प्रस्तुत किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई...

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज “धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026” पेश कर पारित कर दिया गया। इसे प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में प्रस्तुत किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में विधेयक पारित हो गया।

क्या है प्रावधान

इस विधेयक में प्रलोभन, धोखाधड़ी, जबरदस्ती या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने और सामूहिक धर्मांतरण कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है जबकि नाबालिगों, महिलाओं, मानसिक रूप से कमजोर लोगों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े मामलों में 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के मुख्य बिंदू

अवैध धर्मांतरण पर सख्त रोक

प्रस्तावित कानून के तहत बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या किसी भी कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इसमें सोशल मीडिया या डिजिटल माध्यम से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया

यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित प्राधिकारी को सूचना देनी होगी। इस प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान रखा गया है।

स्पष्ट परिभाषाएं और अपवाद

विधेयक में “प्रलोभन”, “दुर्व्यपदेशन”, “प्रपीड़न”, “सामूहिक धर्मांतरण” और “डिजिटल धर्मांतरण” जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अपने पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

सामूहिक धर्मांतरण पर और सख्ती

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी कठोर रखी गई है, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

सख्त कानूनी प्रक्रिया

इस विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी, ताकि तेजी से न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कड़े दंड का प्रावधान

अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक और जुर्माना कम से कम 10 लाख रुपये होगा।

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