शहीद टीआई दिलीप की अंतिम विदाई में फूट-फूट कर रोया गांव, भाई बोला- हत्यारे को मिले सजा-ए-मौत

Edited By meena, Updated: 02 Nov, 2026 07:16 PM

the village wept bitterly at ti dilip s final farewell

देवास जिले के खातेगांव में ड्यूटी पर पदस्थ थाना प्रभारी दिलीप पूरी की हत्या के बाद पूरा गांव स्तब्ध है। मृतक दिलीप सरदारपुर के बिड़वाल गांव के रहने वाले...

धार (संजय बाजपेई) : देवास जिले के खातेगांव में ड्यूटी पर पदस्थ थाना प्रभारी दिलीप पूरी की हत्या के बाद पूरा गांव स्तब्ध है। मृतक दिलीप सरदारपुर के बिड़वाल गांव के रहने वाले थे। सोमवार को जब गांव के लाड़ले दिलीप की मौत की सूचना पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया। परिवार का लाड़ला और समझदार बड़ा बेटा दुनिया से जा चुका था। यह सदमा पूरे परिवार के साथ गांव के हर सदस्य को अंदर से झंझोड़ रहा था। शराब माफियाओं द्वारा थाना प्रभारी दिलीप की निर्ममतापूर्वक हत्या करने के बाद परिवार के हर सदस्य और ग्रामीणों में सिस्टम के प्रति नाराजगी देखने को भी मिली। दिलीप के पिता ओमप्रकाश पूरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हत्यारों को फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। वहीं सरकार शराब माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई करें। वहीं दिलीप के पिता ओमप्रकाश पूरी ने पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच की भी मांग की है।

PunjabKesari

इधर दोपहर बाद अंतिम यात्रा निकली तो गांव में हर किसी की आंखे नम थी। अधिकारियों ने कंधा दिया व पूरे नगर में यात्रा निकलते हुए समाधि स्थल पहुंची. इसके बाद दसानन गोस्वामी समाज की परम्परा अनुसार पैतृक गांव में मठ की भूमि पर समाधि दी गई।

बरमंडल में सोमवार दोपहर शहीद थाना प्रभारी दिलीप पूरी का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे सम्मान के साथ शहीद दिलीप को अंतिम विदाई दी गई। इस घटना के बाद दिलीप को जानने वाला हर शख्स नम आखों के साथ स्तब्ध नजर आया। वहीं गांव में भी मातम का माहौल था। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा दिलीप परिवार में काफी समझदार और लाड़ला था। परिवार की पूरी जिम्मेदारी दिलीप के ही कंधों पर थी। संघर्षों के बीच पला-बड़ा दिलीप हमेशा से पढ़ाई में अव्वल रहा और पढ़ाई के बलबूते उन्होंने शिक्षा में विभाग में भी सेवाएं दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस की नौकरी संभाली। लेकिन ईमानदारी से नौकरी करने और शराब सिंडीकेट पर नकेल कसने का उनका इरादे ने उनकी जान ले ली। गांव में जब उनका अंतिम संस्कार हुआ तो हर कोई अपने आंसू नहीं रोक पाया।

PunjabKesari

मुफ्त में देते थे शिक्षा

शिक्षा के प्रति शहीद दिलीप का ऐसा लगाव था कि वे खुद तो हमेशा सर्वोच्च अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण हुए। साथ ही जब उन्होंने बतौर शिक्षक अपना कॅरियर शुरू किया तो उनके पढ़ाए स्टूडेंट भी उच्च पदों तक पहुंचे। उन्होंने अपने भाई-बहनों को शिक्षित कर बेहतर इंसान बनाने का काम किया। शहीद दिलीप पूरी की बहन दीपिका ने चर्चा में बताया कि वे शिक्षा देने में कभी पीछे नहीं हटे। कुछ संस्थानों में उन्होंने मुफ्त में भी शिक्षा दी है।

PunjabKesari

साथियों को खरोंच तक नहीं

शहीद दिलीप पूरी की बहन दीपिका गोस्वामी ने घटना के बाद कहा कि भाई के हत्यारों पर सरकार सख्त कारवाई करें और हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए। बहन दीपिका ने घटना को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि शराब माफियाओं के साथ-साथ घटना वाले दिन जो साथी मेरे भाई के साथ मौके पर मौजूद थे, उनकी भी जांच की जाना चाहिए। मेरे भाई की हत्या कर दी गई। जबकि इस तरह का कोई हादसा या घटना होती है तो सभी को चोट आती है, लेकिन सिर्फ मेरे भाई की मौत हुई है। इसलिए हर पहलू पर जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलना चाहिए।

बेटे के हत्यारों को फांसी जिन लोगों ने भी इस तरह की घटना की है, वह निंदनीय है। हमारा परिवार अभी दुख है। मेरे बेटे की निर्ममतापूर्वक कुचलते हुए हत्या की गई है। दिलीप के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए और हत्यारों के खिलाफ सरकार बुलडोजर कार्रवाई करें। पूरे मामले की सरकार द्वारा सीबीआई जांच करवाई जाए।

PunjabKesari

घटनाक्रम की न्यायिक जांच करवाएं सरकार

सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने हादसे को लेकर दुख जताते हुए कहा कि सीएम मोहन यादव के राज में जिस प्रकार से नशे का कारोबार फलफूल रहा है। दूसरी तरफ देश के गृहमंत्री प्रदेश को नशामुक्त करने की बात कह रहे है। हमारे बरमंडल के कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी दीपक पूरी खातेगांव में पदस्थ थे, जो अवैध शराब के कारोबार को रोकने गए और उनकी हत्या कर दी गई। विधायक ग्रेवाल ने कहा कि इस मामले में सीएम डॉ. यादव को जवाब देना चाहिए कि कब तक कानून रखवालों को भी इस तरह से अवैध शराब माफिया अपना निशाना बनाएंगे। साथ ही इस मामले की न्यायिक जांच भी होना चाहिए और परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर एक करोड़ की राशि और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना चाहिए।

वहीं उनके साथी पंकज विश्वकर्मा और दिलीप पूरी का कहना है कि बहुत खुशी और गौरव की बात थी, जब वह पहली बार प्रमोट होकर टीआई के रूप में पदोन्नत हुए थे। हाल ही में जब माता पूजन के लिए वह नवरात्र में घर आए थे, तब मैं आखरीबार उनसे मिला। मेरे साथ क्रिकेट, शिक्षा विभाग में भी हमनें साथ काम किया। अपने काम को लेकर वे हमेशा प्राथमिकता देते थे। दिलीप ने कभी हार नहीं मानी, संघर्ष से वे कभी पिछे नहीं हटे। उन्होंने गांव में शिक्षा को लेकर भी काफी काम किया है। उनके पढ़ाए हुए स्टूडेंट भी उन्हीं की तरह कई महत्वपूर्ण पदों पर है। आज वह हमारे बीच नहीं है, यह खबर के बहुत पीड़ा है और पूरा गांव इस दुख को महसूस कर रहा है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!