Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Oct, 2026 01:05 PM

शहर में इन दिनों पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने के मैदान को लेकर किराए का मुद्दा चर्चा में है।
इंदौर। शहर में इन दिनों पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने के मैदान को लेकर किराए का मुद्दा चर्चा में है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस मैदान के लिए कांग्रेस के एक आयोजन से चार दिन के उपयोग का करीब 14 लाख रुपये किराया और जीएसटी लिया गया, उसी जगह को थोक पटाखा बाजार के लिए करीब 40 दिनों तक इस्तेमाल करने पर शुल्क कितना तय किया गया है। खास बात यह है कि पटाखा बाजार शुरू होने की तैयारी के बावजूद भारतीय विकास प्राधिकरण (IDA) की ओर से अभी तक अंतिम शुल्क स्पष्ट नहीं किया गया है।
रीजनल पार्क के सामने मैदान में इस बार करीब 41 अस्थायी थोक पटाखा दुकानें तैयार की जा रही हैं। दुकानों के अलावा बिजली व्यवस्था, जनरेटर, रोशनी के टावर और पार्किंग जैसी सुविधाओं की भी व्यवस्था की जानी है। शनिवार को पटाखा कारोबारियों की बैठक में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई। व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल मैदान के उपयोग के लिए पांच लाख रुपये से कम राशि ली गई थी, जबकि इस बार यह रकम बढ़कर करीब सात लाख रुपये तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।
व्यापारियों से जुटाई जा रही रकम
पटाखा व्यापारी एसोसिएशन की ओर से दुकानदारों से फिलहाल करीब एक-एक लाख रुपये जमा करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि इस राशि से अस्थायी दुकानें तैयार करने, बिजली, सुरक्षा, मैदान और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च निकाला जाना है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि IDA की ओर से अभी तक उन्हें औपचारिक डिमांड नोट नहीं दिया गया है।
यही वजह है कि कारोबारियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अंतिम शुल्क तय होने से पहले इतनी बड़ी रकम किस आधार पर जुटाई जा रही है। शनिवार को व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल IDA अधिकारियों से मिला और शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पिछले साल के भुगतान पर भी उठे सवाल
मामला केवल इस साल के शुल्क तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पिछले वर्ष पटाखा बाजार के लिए IDA ने करीब पांच लाख रुपये या उससे कम राशि ली थी। व्यापारियों का कहना है कि प्राधिकरण ने जितनी रकम बताई, उन्होंने उतना भुगतान कर दिया था। अब यदि पिछले वर्ष की राशि को कम बताया गया था तो उसकी अतिरिक्त वसूली का भार कारोबारियों पर डालने को लेकर भी आपत्ति है।
दरअसल, राहुल गांधी के आयोजन के दौरान इसी मैदान के उपयोग के लिए कांग्रेस की ओर से करीब 14 लाख रुपये और जीएसटी का भुगतान किया गया था। बताया गया कि शुरुआती तौर पर करीब 10 लाख रुपये जमा हुए थे, इसके बाद लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी जमा कराई गई। इसी तुलना के बाद पटाखा बाजार के शुल्क को लेकर बहस तेज हुई है।
IDA ने क्या कहा?
IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े के मुताबिक मैदान पटाखा बाजार के लिए हर साल शुल्क लेकर ही उपलब्ध कराया जाता है। उनका कहना है कि इस साल भी शुल्क लिया जा रहा है, हालांकि फिलहाल उन्हें राशि का आंकड़ा याद नहीं है।
वहीं, कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले में पिछले और मौजूदा वर्ष के शुल्क का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है। कांग्रेस का तर्क है कि उसका आयोजन सामाजिक और गैर-व्यावसायिक प्रकृति का था, इसके बावजूद चार दिन के लिए करीब 14 लाख रुपये का भुगतान किया गया। ऐसे में व्यावसायिक गतिविधि के लिए लंबे समय तक मैदान दिए जाने पर तय दर की पारदर्शिता सामने आनी चाहिए। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 40 दिन के पटाखा बाजार के लिए IDA आखिर कितनी राशि वसूल रहा है और क्या यह शुल्क निर्धारित नियमों और रेट कार्ड के मुताबिक है। पिछले वर्षों के रिकॉर्ड और इस साल की डिमांड सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।