आज़ादी के 79 साल बाद भी अंधेरे में 21 गांव! बारनवापारा के वनांचल में बिजली और सड़क का इंतजार

Edited By Vandana Khosla, Updated: 09 Jun, 2026 09:33 AM

21 villages still in the dark even 79 years after independence

बलौदाबाजार (अशोक टण्डन):  देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सोनाखान ब्लॉक अंतर्गत बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 21 गांव आज भी बुनियादी...

बलौदाबाजार (अशोक टण्डन):  देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सोनाखान ब्लॉक अंतर्गत बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 21 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां न बिजली है, न पक्की सड़क। ग्रामीणों का आरोप है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी वे विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं।

बारनवापारा के घने जंगलों के बीच बसे इन 21 गांवों में सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। मोबाइल चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के काम तक ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र होने के कारण रात में जंगली जानवरों और जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। अंधेरे की वजह से कई बार हादसे और जनहानि की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

सिर्फ बिजली ही नहीं, सड़क की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आज भी खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता है। कई किलोमीटर पैदल चलकर मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली और सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जनता आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद वीर नारायण सिंह की धरती पर बसे इन गांवों को अब और उपेक्षित नहीं रखा जाना चाहिए।

"एक तरफ सरकार गांव-गांव विकास पहुंचाने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन बारनवापारा वनांचल के ये 21 गांव आज भी बिजली और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी इन गांवों तक विकास की रोशनी कब पहुंचेगी? वहीं ग्रामीणों का का कहना है बेटियां अब बड़ी हो चुकी है शादी के लिए रिस्ते नहीं आ रहे हैं ऐसे में क्या इन बेटियों को भी जीवन साथी मिलने दिक्कतें आ रही है।  


 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!