साल पहले CM मोहन ने बड़े शौक से किया था करोड़ों की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास,अब कबाड़ में मिली पट्टिकाएं,अधिकारी अनजान

Edited By Desh Raj, Updated: 01 Jul, 2026 07:29 PM

chief minister s foundation stones worth crores found in scrap

मध्य प्रदेस के छतरपुर से एक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के करोड़ों के शिलान्यास किए पट्टिकाएं कबाड़ में मिले हैं।

छतरपुर (राजेश चौरसिया): मध्य प्रदेस के छतरपुर से एक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के करोड़ों के शिलान्यास किए पट्टिकाएं कबाड़ में मिले हैं। पिछले वर्ष अगस्त 2024 में ददरीखाना महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास किया था। बड़े मंच से विकास के दावे किए गए, योजनाओं की घोषणाएं हुईं और शिलान्यास के पत्थरों का अनावरण किया गया। लेकिन एक साल बाद उन्हीं शिलान्यास पत्थरों का हाल देखकर हर कोई हैरान है।मुख्यमंत्री के हाथों अनावरण किए गए ये पत्थर आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) विभाग के कार्यालय परिसर में कबाड़ के बीच लावारिस हालत में पड़े मिले।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब इस संबंध में आरईएस विभाग के कार्यपालन यंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना था कि "यह मेरे विभाग का मामला नहीं है। मैं दिखवाता हूं, नोटिस देता हूं।" ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि शिलान्यास पत्थर विभाग से संबंधित नहीं हैं तो वे विभागीय परिसर के कबाड़ तक पहुंचे कैसे?

मामले की जानकारी मिलने पर अपर कलेक्टर से भी सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने केवल जांच कराने की बात कही। फिलहाल न किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई है और न ही इस लापरवाही पर कोई कार्रवाई सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जिन योजनाओं को जिले के विकास की बड़ी सौगात बताया गया था, उनमें से कई पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ। दूसरी ओर उन्हीं योजनाओं के शिलान्यास पत्थर कबाड़ में पड़े होना प्रशासनिक उदासीनता की तस्वीर पेश करता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या शिलान्यास केवल मंचीय कार्यक्रम और प्रचार तक ही सीमित रह गए हैं।

यदि करोड़ों रुपये की योजनाओं के प्रतीक पत्थरों की भी जिम्मेदारी तय नहीं है, तो योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।एक साल बाद भी न तो कई परियोजनाओं की प्रगति स्पष्ट है और न ही शिलान्यास पत्थरों के कबाड़ में पहुंचने की जवाबदेही तय हो सकी है। ऐसे में विकास के दावों और प्रशासनिक जवाबदेही, दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

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