Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Jul, 2026 02:08 PM

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।
भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब दोनों दलों के दिग्गज नेता और स्टार प्रचारक चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दो दिन दतिया की सियासत के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
इस उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं है। आजाद समाज पार्टी की सक्रिय मौजूदगी ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीसरे मोर्चे की मौजूदगी कई मतदान केंद्रों पर वोटों का संतुलन प्रभावित कर सकती है, जिसका असर सीधे जीत-हार के अंतर पर पड़ सकता है।
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत इस बार कुल 22 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने के कारण निर्वाचन आयोग ने दो बैलेट यूनिट लगाने का फैसला किया है, क्योंकि एक बैलेट यूनिट में अधिकतम 16 प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिन्ह ही प्रदर्शित किए जा सकते हैं। इनमें नोटा (NOTA) का विकल्प भी शामिल रहेगा। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 28 जुलाई की शाम प्रचार अभियान थम जाएगा। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के साथ परिणाम घोषित किए जाएंगे।
भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव प्रचार का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। वहीं कांग्रेस भी अपने वरिष्ठ नेताओं और स्टार प्रचारकों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है। दोनों दलों का फोकस अंतिम दौर में अधिक से अधिक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर है।
दतिया उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा और दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे में अब सबकी नजरें स्टार प्रचारकों की सभाओं और मतदान के दिन मतदाताओं के रुझान पर टिकी हैं।