Edited By meena, Updated: 16 Aug, 2026 08:12 PM

प्रधानमंत्री ने अप्रत्यक्ष तौर पर युवाओं के आंदोलन को नक्सल विचारधारा से जोड़ा। यह देश की भावी पीढ़ी का अपमान है। आप देश के युवाओं को साफ निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली दे पा नहीं रहे
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किला से तथा मुख्यमंत्री ने पुलिस परेड ग्राउंड से 15 अगस्त को जो उद्बोधन दिया वह देश और प्रदेश की जनता को निराश करने वाला था। प्रधानमंत्री ने अप्रत्यक्ष तौर पर युवाओं के आंदोलन को नक्सल विचारधारा से जोड़ा। यह देश की भावी पीढ़ी का अपमान है। आप देश के युवाओं को साफ निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली दे पा नहीं रहे। आपके राज में नौकरियां बेची जा रही है। विरोध पर बच्चे सामने आ रहे तो वे नक्सली हो गये, देश के प्रधानमंत्री भारत की 65 प्रतिशत युवा आबादी से माफी मांगे। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने रोजगार शिक्षा विकास पर कुछ नहीं बोला केवल पूर्ववर्ती सरकारों को कोसने का काम किये।
संसद में पारित मिनरल संशोधन अधिनियम छत्तीसगढ़ के हितों के खिलाफ
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार ने संसद के इस सत्र में मिनरल संशोधन अधिनियम पारित किया है। इस संशोधन के अनुसार अब राज्य सरकारें अपने राज्यों से निकलने वाले खनिजो पर उपकर नहीं लगा सकती। छत्तीसगढ़ से कोयला, बाक्साईड, आयरन और जैसे अनेंको खनिज निकलते है। अब हमारे राज्य से निकलने वाले खनिजों पर हम टैक्स नहीं ले सकते। कांग्रेस इसका विरोध करती है। मोदी सरकार ने अडानी को फायदा पहुंचाने यह कानून बनाया है।
करोंड़ो का धान खुले में भीग कर सड़ रहा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान आज भी संग्रहण केन्द्रों में पड़ा है। लगभग 15 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा सड़ रहा है। सरकार ने उसको जानबूझकर निराकरण नहीं किया ताकि धान खराब होना बताकर भ्रष्टाचार किया जा सके। कांग्रेस प्रदेश के सभी जिलों में जांच कमेटी भेजकर खुले में पड़े धान का भौतिक परीक्षण करवाने जा रही है। कांग्रेस किसानों की जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद होने के खिलाफ आवाज उठायेगी।
शिक्षकों के पेंशन की गणना में 2018 के संविलियन से पहले के सेवा अवधि को शामिल करें सरकार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि शिक्षकों के पेशन की गणना 2018 के संविलियन अवधि के आधार पर की जायेगी। इस आधार पर 2018 से 2026 तक कवल 8 वर्ष के काम करने को आधार माना गया है। 1998 से 2018 तक काम करने वाले शिक्षकों की वरीयता इसमें नहीं जुड़ेगी, यह अन्याय है। हमारी मांग है कि जब से सेवाकाल में आये है। उसी दिन सेवा माना जाये।