Edited By Himansh sharma, Updated: 30 Jul, 2026 05:12 PM

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित सेक्स सीडी प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित सेक्स सीडी प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की न्यायिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह राहत उस याचिका पर मिली, जिसमें बघेल ने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी। न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक मामले पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी। इससे फिलहाल बघेल के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पर विराम लग गया है।
2017 के चर्चित मामले से जुड़ा है विवाद
यह मामला वर्ष 2017 में सामने आए उस कथित मॉर्फ्ड अश्लील वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से वीडियो तैयार कर उसके प्रसार का आरोप लगाया गया था। बाद में इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी।
CBI ने अपनी जांच के बाद दायर आरोपपत्र में भूपेश बघेल सहित अन्य आरोपियों पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
पहले मिली थी डिस्चार्ज, बाद में पलटा गया आदेश
मामले में मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त न मानते हुए भूपेश बघेल को आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में CBI की विशेष अदालत ने उस आदेश को निरस्त करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दे दिया। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए बघेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बचाव पक्ष की दलील
हाईकोर्ट में भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने तर्क दिया कि यदि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही जारी रहती है, तो हाईकोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए अंतिम निर्णय आने तक ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि भूपेश बघेल कथित वीडियो के निर्माण या उसके प्रसार में शामिल थे। केवल सह-आरोपियों के संपर्क में होना या उनकी गिरफ्तारी के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस करना किसी आपराधिक साजिश में शामिल होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। अब अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट इस मामले में भूपेश बघेल के खिलाफ कोई नई न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकेगा। यह आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और मामले की अंतिम सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विशेष अदालत का आदेश बरकरार रहेगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।