Edited By meena, Updated: 05 May, 2026 03:41 PM

छत्तीसगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की कमी को लेकर न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस गंभीर मुद्दे पर सुनवाई शुरू की है, जिससे राज्य में आपातकालीन तैयारियों
रायपुर : छत्तीसगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की कमी को लेकर न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस गंभीर मुद्दे पर सुनवाई शुरू की है, जिससे राज्य में आपातकालीन तैयारियों की स्थिति पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य के 17 जिलों के कलेक्टरों को अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्नि सुरक्षा निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र का जवाब न देना गंभीर लापरवाही है। यह पत्र 25 मार्च 2026 को भेजा गया था, और 27 अप्रैल को रिमाइंडर के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
फायर स्टेशन के लिए जमीन की मांग
निदेशक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं ने जिन जिलों को पत्र भेजा, उनमें रायपुर, बिलासपुर, नारायणपुर, सुकमा, गरियाबंद, बीजापुर, मुंगेली और बेमेतरा सहित कई जिले शामिल हैं। पत्र में जिला मुख्यालयों में फायर स्टेशन बनाने के लिए सुगम पहुंच वाली जमीन जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया था।
संसाधनों की भारी कमी
राज्य में अग्नि सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। 200 से अधिक ब्लॉक मुख्यालयों में से करीब 145 जगहों पर एक भी फायर ब्रिगेड वाहन उपलब्ध नहीं है। वहीं राजधानी रायपुर में 22 और बिलासपुर में केवल 10 अग्निशमन वाहन मौजूद हैं। यह आंकड़े आपातकालीन स्थिति में जोखिम को दर्शाते हैं।
व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव
2018 से पहले अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों के पास थी, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने कानून बनाकर अलग अग्नि सुरक्षा निदेशालय की स्थापना की। इसके तहत हर जिले में अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है, लेकिन अभी तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
अगली सुनवाई और निर्देश
हाईकोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 23 जून को तय की है। साथ ही, आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इस मामले में जल्द और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील विषय में समय पर निर्णय लेना कितना जरूरी है।