मां की बहादुरी: मासूम को बचाने जलती झोपड़ी में कूदी, अपनी जान दाव पर लगाकर बचाई बच्ची

Edited By meena, Updated: 05 Mar, 2026 05:43 PM

in chhatarpur she jumped into a burning hut to save an innocent child

छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के ग्राम कितपुरा में झोपड़ी में आग लगने से 6 माह की मासूम बच्ची अंजली राजपूत गंभीर रूप से झुलस गई...

छतरपुर (राजेश चौरसिया) : छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के ग्राम कितपुरा में झोपड़ी में आग लगने से 6 माह की मासूम बच्ची अंजली राजपूत गंभीर रूप से झुलस गई। बच्ची को बचाने के लिए उसकी मां अशोका राजपूत (25) जलती झोपड़ी में कूद गई और किसी तरह बेटी को बाहर निकाल लाई, लेकिन इस दौरान बच्ची बुरी तरह जल गई और मां भी झुलस गई। फिलहाल बच्ची का जिला अस्पताल छतरपुर के बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है।

यह है पूरा मामला

परिवार के अनुसार घटना होली जलने वाले दिन की है। उस समय घर में साफ-सफाई और त्योहार की तैयारी चल रही थी। मां ने अपनी 6 माह की बेटी अंजली को घर के बाहर बनी घास-फूस की झोपड़ी नुमा छोटी दुकान में लिटा दिया था, जहां अन्य छोटे बच्चे भी खेल रहे थे। इसी दौरान अज्ञात कारणों से झोपड़ी में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया।

बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर मां अशोका राजपूत दौड़कर मौके पर पहुंची और बिना देर किए जलती झोपड़ी के अंदर घुसकर अपनी बेटी को बाहर निकाल लाई। हालांकि तब तक बच्ची गंभीर रूप से झुलस चुकी थी और मां भी आग की लपटों से घायल हो गई। आगजनी में झोपड़ी और उसमें रखा दुकान का पूरा सामान भी जलकर खाक हो गया।

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इलाज के लिए भटकता रहा परिवार

घटना के बाद परिजन सबसे पहले बच्ची को गौरिहार अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे बांदा अस्पताल रेफर कर दिया। परिवार का आरोप है कि उस समय उन्हें एम्बुलेंस नहीं मिली, इसलिए 2500 रुपए खर्च कर प्राइवेट चार पहिया वाहन से बांदा अस्पताल ले जाना पड़ा।

कई अस्पतालों के चक्कर

राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार के क्षेत्र में रहने वाले पीड़ित परिवार के लिए सबसे दुख की बात यह रही कि बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए उन्हें एंबुलेंस नहीं मिली। ऐसे में परिवार 2500 रुपये में गाड़ी करके बच्ची को गौरिहार अस्पताल से बांदा अस्पताल ले गये। बांदा अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को कानपुर रेफर कर दिया।

लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण परिवार कानपुर नहीं जा सका। इसके बाद बच्ची को फिर गौरिहार अस्पताल लाया गया। वहां से जिला अस्पताल छतरपुर रेफर किया गया। यहां भी एम्बुलेंस नहीं मिलने पर 2500 रुपए में प्राइवेट बोलेरो से जिला अस्पताल पहुंचे। पीड़ित परिवार ने जैसे कैसे रिस्तेदारों से उधार लेकर गाड़ी और आने जाने का पैसा दिया।

जिला अस्पताल में इलाज नहीं सिर्फ इंजेक्शन लगाये गए। पट्टी बांदा अस्पताल की लगी और बर्न वार्ड के AC बंद होने के कारण रहती बच्ची 24 घंटे तड़पती रही। जिला अस्पताल नर्सों और वॉर्ड बॉय के भरोसा दिखा क्योंकि होली पर 2 दिन से डॉक्टर देखने तक नहीं आये।

इलाज में लापरवाही का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उनका कहना है कि बच्ची को सिर्फ इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं और पट्टी भी वही है जो बांदा अस्पताल में की गई थी। परिवार का कहना है कि बच्ची की हालत गंभीर है, लेकिन उपचार पर्याप्त नहीं हो पा रहा।

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। माता-पिता का कहना है कि वे बाहर किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की स्थिति में नहीं हैं। छतरपुर में रहने, खाने और दवाइयों का खर्च उठाना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है। परिजन बताते हैं कि गाड़ी का किराया भी उन्होंने अपनी जमा पूंजी और रिश्तेदारों से उधार लेकर दिया है।

पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन और आमजन से मदद की गुहार लगाई है। बता दें कि यह परिवार चंदला विधानसभा क्षेत्र का निवासी है, जहां से दिलीप अहिरवार विधायक और राज्य मंत्री हैं।

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