मृत शिक्षकों को नोटिस भेजकर शिक्षा विभाग ने पूछा- ई-अटेंडेंस पर हाजरी क्यों नहीं लगा रहे ? 3 दिन में जवाब दो

Edited By Desh sharma, Updated: 19 Nov, 2025 04:46 PM

in rewa the education department sent notices to deceased teachers

रीवा में ई अटेंडेंस मामले में शिक्षा विभाग की लापरवाही देखने में सामने आई है। शिक्षक एप्प में शून्य इनकमिंग दिखाने पर जारी किए गए नोटिस में तीन ऐसे शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है जो पहले ही इस दुनिया को छोड़कर जा चुके है।

रीवा (गोविंद सिंह): रीवा में ई अटेंडेंस मामले में शिक्षा विभाग की लापरवाही देखने में सामने आई है। शिक्षक एप्प में शून्य इनकमिंग दिखाने पर जारी किए गए नोटिस में तीन ऐसे शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है जो पहले ही इस दुनिया को छोड़कर जा चुके है।

शिक्षा विभाग का कारनामा, 3 मृत शिक्षकों को भेज दिया नोटिस

इस नोटिस के बाद सवाल यह उठता है कि मृत शिक्षकों को वेतन भत्ते अब भी दिए जा रहे थे जो उसे रोकने के निर्देश दिए गए है। हालांकि मामला सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, और अधिकारी इसे त्रुटि मानकर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए है।

मृत टीचरों को नोटिस जारी करके पूछा- ई-अटेंडेंस पर हाजरी क्यों नहीं लगा रहे?

 

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प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू कर दी गई। शुरू में इसका विरोध भी किया गया लेकिन अब सख्ती बरती की जा रही है। विभाग ने 1500  से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस भेजा कि वे शिक्षक एप्प पर रोजाना हाजरी क्यों नहीं लगाई जा रही है।

जानकारी सामने आने पर विभाग में मचा हड़कंप

लेकिन इसमें शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही देखने में सामने आई है। होश उड़ाने वाली बात है कि  जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसे शिक्षकों को नोटिस जारी किए हैं जिनकी मौत पहले ही हो चुकी हैं। इन मृत शिक्षकों से ई-अटेंडेंस नहीं लगाने का कारण स्पष्ट करने को कहा गया है।

नोटिस में लिखा है कि अगर 3 दिन के अंदर जवाब नहीं दिया तो वेतन काट लिया जाएगा। अब असली समस्या ये है कि जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है,  उनमें एक शिक्षक देवतादीन कोल की मौत 2023 में हो गई थी, जबकि शिक्षक छोटेलाल साकेत और शिक्षक रामगरीब दीपांकर की मौत इसी साल  2025 में हुई थी।

ये जानकारी लगने के बाद कि जिन शिक्षकों को नोटिस भेजा गया वो परलोक सिधार चुके हैं, शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिम्मेदार अधिकारी इसे विभागीय त्रुटि मानते हुए इसमें सुधार करवाने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ रहे है। लेकिन ये इतनी बड़ी लापरवाही साफ दिखा रहा है कि विभाग आज भी किस ढर्रे पर काम कर रहे हैं ।

 

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