Edited By meena, Updated: 24 Feb, 2026 12:20 PM

काल भैरव मंदिर के पीछे स्थित अघोर अखाड़ा, काल भैरव घाट पर वर्षों से तपस्या कर रहे अघोरी पीठाधीश्वर योगी विष्णूनाथ (खडेश्वरी अघोरी बाबा) ने प्रशासनिक कार्रवाई से आहत होकर धर्म परिवर्तन...
उज्जैन (विशाल सिंह) : काल भैरव मंदिर के पीछे स्थित अघोर अखाड़ा, काल भैरव घाट पर वर्षों से तपस्या कर रहे अघोरी पीठाधीश्वर योगी विष्णूनाथ (खडेश्वरी अघोरी बाबा) ने प्रशासनिक कार्रवाई से आहत होकर धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है। योगी विष्णूनाथ अपने गुरु योगी बम-बम नाथ महाराज के मार्गदर्शन में श्री बम-बम भूतेश्वर महादेव मंदिर, गोरक्ष धूना, काल भैरव घाट पर बीते 12 वर्षों से भगवान काल भैरव की अखंड खड़ेश्वरी अघोर तपस्या कर रहे हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म में यज्ञ, अनुष्ठान, पूजा-पाठ एवं हवन का विशेष महत्व है, वहीं भगवान काल भैरव की वाममार्गीय पंचमकार साधना में मदिरा का विशिष्ट स्थान माना गया है। योगी विष्णूनाथ के अनुसार, सत्य सनातन धर्म की रक्षा, गौमाता संरक्षण, मृत आत्माओं को मोक्ष, जनकल्याण एवं विश्व कल्याण के उद्देश्य से काल भैरव घाट पर 08 दिवसीय ‘अष्टधारा मदिरा महायज्ञ’ का आयोजन प्रस्तावित है।
यह महायज्ञ 08 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित है, जिसमें प्रतिदिन लगभग 500 लीटर मदिरा आठ फीट गहरे हवन कुंड में ज्वाला चेतन कर कलशों के माध्यम से 24 घंटे निरंतर आठ धाराओं में अर्पित की जाएगी। यह आयोजन भगवान महाकाल के सेनापति भगवान काल भैरव को समर्पित बताया गया है।

योगी विष्णूनाथ ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले ही नगर निगम के कर्मचारी आश्रम पहुंचे और पूजा-सामग्री जब्त कर ली। साथ ही उन्हें आयोजन न करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम का नल कनेक्शन और अन्य व्यवस्थाएं क्षतिग्रस्त कर दी गईं। योगी विष्णूनाथ ने बताया कि उन्होंने आयोजन के लिए कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से विधिवत अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने प्रशासन पर धार्मिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि बुधवार तक साधना की अनुमति नहीं मिली और जब्त किया गया सामान वापस नहीं किया गया, तो वे सनातन धर्म त्यागकर इस्लाम स्वीकार करने को मजबूर होंगे। अघोरी बाबा ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार संतों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक तपस्वी को उसकी वर्षों पुरानी साधना से रोका जा रहा है।