पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल ! इस अधिकारी का किया ट्रांसफर, जानें कहां भेजा

Edited By Vandana Khosla, Updated: 25 Apr, 2026 04:40 PM

major reshuffle in the police department this officer

भिण्डः मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के लहार अनुभाग के मिहोना थाने में पदस्थ रहे विवादित पुलिस निरीक्षक विजय केन का बालाघाट तबादला कर दिया गया है। दरअसल, मार्च में सेवानिवृत्त सूबेदार एवं पूर्व सैनिक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह कुशवाह के साथ हुए विवाद...

भिण्डः मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के लहार अनुभाग के मिहोना थाने में पदस्थ रहे विवादित पुलिस निरीक्षक विजय केन का बालाघाट तबादला कर दिया गया है। दरअसल, मार्च में सेवानिवृत्त सूबेदार एवं पूर्व सैनिक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह कुशवाह के साथ हुए विवाद के बाद टीआई चर्चा में आए थे। ग्वालियर-चंबल संभाग के पूर्व सैनिकों के भारी विरोध और थाने के घेराव के बाद भिण्ड पुलिस अधीक्षक (एसपी) असित यादव ने टीआई को लाइन हाजिर किया था। वर्तमान में निरीक्षक के तबादले के बाद पूर्व सैनिकों ने इसे नाकाफी बताते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।      

जानकारी के अनुसार, मार्च में मिहोना थाना प्रभारी विजय केन और सेवानिवृत्त सूबेदार राकेश सिंह कुशवाह के बीच विवाद हो गया था। इस घटना के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के पूर्व सैनिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने मिहोना थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी। पूर्व सैनिकों के बढ़ते दबाव के बाद एसपी असित यादव ने टीआई विजय केन को लाइन हाजिर कर दिया था। थाने के घेराव और प्रदर्शन के बाद यह मामला आर्मी हेडक्वाटर्र तक पहुंच गया था। डिप्टी कमांडेंट कर्नल विशाल क्षेत्रीय ने मामले को गंभीरता से लिया था। उन्होंने मिहोना थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी। इसके बाद कर्नल ने भिंड एसपी से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी।      

पूर्व सैनिक संघ लगातार टीआई विजय केन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग करता रहा है। टीआई के बालाघाट स्थानांतरण के बाद यह मामला एक तरह से ठंडा पड़ता नजर आ रहा है और प्रकरण की जांच की रफ्तार भी धीमी दिखाई दे रही है। हालांकि पूर्व सैनिकों का स्पष्ट कहना है कि केवल ट्रांसफर से मामले को समाप्त नहीं माना जा सकता। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई होना जरूरी है।


 

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