Edited By Vandana Khosla, Updated: 12 May, 2026 11:54 AM

ग्वालियरः एमपी के ग्वालियर में से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां विशेष न्यायालय के निर्देश पर तत्कालीन ग्वालियर एसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों पर मामला दर्ज किया है। कोर्ट में पेश दस्तावेजों और गवाहों के बयान के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।...
ग्वालियरः एमपी के ग्वालियर में से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां विशेष न्यायालय के निर्देश पर तत्कालीन ग्वालियर एसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों पर मामला दर्ज किया है। कोर्ट में पेश दस्तावेजों और गवाहों के बयान के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। दरअसल, यह मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा है। हैरान करने वाली बात है कि मामले से संबंधित अहम सबूत मिटा दिए गए।
दरअसल, ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार, पूरा मामला दीनदयाल नगर निवासी अनूप राणा के परिवार से जुड़ा है। अनूप के भाई के खिलाफ धोखाधड़ी (420) का केस दर्ज था, जो पैसों के लेन-देन से संबंधित बताया गया। दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात भी हो चुकी थी। शिकायतकर्ताओं ने जांच अधिकारी से आरोपी का नाम एफआईआर से हटाने की बात कही थी।
आरोप है कि इसके बाद जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार ने दोनों पक्षों से पैसों की मांग शुरू कर दी। परिवाद के अनुसार, अनूप पक्ष पहले ही करीब 4.90 लाख रुपये दे चुका था। फिर 23 दिसंबर 2023 को अनूप को फोन कर थाने बुलाया गया, जहां उसे पूरी रात बैठाकर रखा गया और अगले दिन पैसों के लिए दबाव बनाया गया।
शिकायत में कहा गया है कि 24 दिसंबर 2023 को पुलिसकर्मियों ने अनूप को थाने में रोके रखा और उसके घर से करीब 9.75 लाख रुपये उठवा लिए। यह रकम आरक्षक संतोष वर्मा के जरिए ली गई बताई गई है। वहीं, चंद्रलेखा जैन नाम की महिला पर भी दबाव बनाया गया और उसके घर से करीब 15 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है। इस तरह दोनों जगहों से लगभग 30 लाख रुपये वसूले जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि पैसों से भरा लाल बैग थाने में दिया गया था और पूरी घटना CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई थी। आरोप है कि पुलिसकर्मी लगातार फोन कर रहे थे, घर पर दबिश दे रहे थे और पैसे मांग रहे थे। अनूप राणा ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही आरोपी बना दिया गया। बाद में जमानत मिलने के बाद उन्होंने विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया। इसमें तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा को आरोपी बनाया गया।
कोर्ट में 24 और 25 दिसंबर 2023 की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि फुटेज में पैसों से भरा लाल बैग और पुलिसकर्मियों की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही थीं। लेकिन पुलिस ने कोर्ट को बताया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। जांच में सामने आया कि 3 जनवरी 2024 से पहले की CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट हो चुकी थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोप कानून की रक्षा करने वाले अधिकारियों पर हैं, इसलिए मामला गंभीर है। कोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि पहले अपराध किया गया और बाद में सबूत मिटाने की कोशिश हुई। इसी आधार पर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, टीआई सुरेंद्र नाथ यादव, सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ IPC की धारा 392, 201, 120-B और एमपीडीपी एक्ट की धारा 11/13 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। अब सभी की नजर आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।