Edited By Himansh sharma, Updated: 11 May, 2026 06:48 PM

औचक निरीक्षण की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने जो किया
दतिया: औचक निरीक्षण की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने जो किया, उसने पूरे महकमे को झकझोर कर रख दिया। यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि पुलिस की सतर्कता और जिम्मेदारी की असली परीक्षा थी।
शनिवार रात करीब 11 बजे एसपी खुद ग्वालियर-झांसी हाईवे स्थित गोराघाट थाने पहुंचे। बाहर सन्नाटा था और भीतर बेफिक्री की नींद। संतरी से लेकर अधिकांश स्टाफ थाने के कमरों में सो रहा था। थाना, जो रात में सुरक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, वहीं लापरवाही की तस्वीर दिखाई दी।
एसपी बिना किसी शोर-शराबे के थाने के अंदर गए। उन्होंने कुछ अहम फाइलें उठाईं और बाहर आ गए। कुछ देर बाद जब स्टाफ को जगाया गया और बताया गया कि थाने से जरूरी फाइलें गायब हैं, तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। नींद में डूबा स्टाफ अचानक रिकॉर्ड रूम में फाइलें खोजने लगा। चेहरे पर घबराहट साफ दिखाई देने लगी।
मामला इतना बढ़ा कि पास के सरकारी आवास में भोजन कर रहे थाना प्रभारी रमेश शाक्य को भी तत्काल बुलाना पड़ा। पूरे थाने में अफरा-तफरी मच गई। काफी देर तक तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तब एसपी ने खुद फाइलें लौटाईं और एक सख्त लेकिन जरूरी संदेश दिया - थाना सिर्फ भवन नहीं, जनता की सुरक्षा का भरोसा है। यहां लापरवाही की कोई जगह नहीं।
यह घटना सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां जिम्मेदारी की कुर्सियों पर कभी-कभी नींद भारी पड़ जाती है। दतिया एसपी का यह तरीका भले अलग था, लेकिन उसने पुलिस महकमे को यह जरूर याद दिला दिया कि रात की ड्यूटी सिर्फ मौजूद रहने की नहीं, बल्कि हर पल चौकन्ना रहने की होती है।