Edited By meena, Updated: 21 Aug, 2023 12:45 PM

अभी सावन मास में श्रधालु विभिन्न मंदिरों में दर्शन लाभ और भगवान शिव का आशीर्वाद लेने धार्मिक स्थलों में पहुंच रहे हैं...
मंडला(अरविंद सोनी): अभी सावन मास में श्रधालु विभिन्न मंदिरों में दर्शन लाभ और भगवान शिव का आशीर्वाद लेने धार्मिक स्थलों में पहुंच रहे हैं। लेकिन बहुत से प्राचीन मंदिर ऐसे हैं जो देख रेख के अभाव में अस्तित्व खो रहे हैं। हम एक ऐसे ही धार्मिक स्थल की बात कर रहे हैं जो कि बेनामी के अंधेरे में हैं। हम बात कर रहे भगवान शंकर के एक प्राचीन मंदिर की जिसमें स्थापित शिव लिंग पर पानी की बूंदें डालने पर पारस मणि के समान चमकता हैं। दो शिवलिंगों के बीच जमीन में धंसता शिवलिंग जो कि चमकदार हैं। जो कि हमेशा से आकर्षण और भक्ति का केंद्र बना हुआ हैं।

मंडला से करीब 30 किलोमीटर दूर देवगांव है जो कि वर्षों से श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ हैं। सुंदर वादियों और नर्मदा नदी के साथ अन्य नदियों का संगम देखते ही बनता हैं। यहां के भगवान शिव के प्राचीन मंदिर की बात की जाये तो शिव लिंग जो कि जमीन की और धंसता जा रहा हैं जिसे ग्रामीणों द्वारा खोदकर बाहर लाने की कोशिश की गई लेकिन कोई उसे बाहर नहीं निकाल पाया।

वही यह शिव लिंग जो कि 200 वर्षों से ज्यादा समय से यहां स्थापित है। उसमें पानी डालने पर वह पारस मणि के समान चमकता हैं जो कि अकल्पनीय हैं। अब स्थानीय लोगों और आश्रम के महाराज द्वारा इस स्थल को सुरक्षित रखा जा रहा। हालांकि अभी भी प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं हैं।
इस धार्मिक स्थल पर महाराज जगदमनी का आश्रम हैं। उन्होंने यहां तपस्या की थी। इसे परशुराम की जन्म स्थली भी बताया जाता हैं। तो वही संत महात्माओं ने यहां जीवंत समाधि भी ली हैं। यहां पर संत गंगा भारती, संत शिव गिरी महाराज, संत सूरज भारती की समाधि हैं, जिसका उल्लेख स्कंध कांड रेवाखन्डे के 44 वें अध्याय में किया गया हैं। यहां मकर संक्रांति, शिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा में श्रधालुओं का तांता लगा होता है। अब प्रशासन को देवगांव के इस धार्मिक स्थल को सहेजने की आवश्यकता हैं।