Edited By Desh sharma, Updated: 22 Jan, 2026 12:35 AM

मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल धान खरीदी में एक महाघोटला सामने आया है जिसको जानकर हर कोई हैरान है। जिले की मझौली तहसील में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी करने की कोशिश...
(जबलपुर): मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल धान खरीदी में एक महाघोटला सामने आया है जिसको जानकर हर कोई हैरान है। जिले की मझौली तहसील में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी करने की कोशिश हुई। जांच में ऑनलाइन दर्ज खरीदी और भौतिक रूप से मौजूद धान में करीब 15 हजार क्विंटल का अंतर पाया गया है।
वृहताकार सेवा सहकारी संस्था द्वारा संचालित श्रीजी वेयरहाउस में बिना एक दाना धान खरीदे ही कागजों पर 3 करोड़ 53 लाख की फर्जी खरीदी शो कर दी गई। ई-उपार्जन पोर्टल पर 14,934 क्विंटल धान की एंट्री दर्ज की गई, लेकिन जांच में गोदाम में इतनी मात्रा में धान पाया ही नहीं गया। खरीद विपणन वर्ष 2025-26 में ई-उपार्जन पोर्टल के अनुसार 65,235 क्विंटल धान की खरीदी दर्शाई गई है, जबकि भौतिक सत्यापन में 14,934 क्विंटल धान कम पाया गया।
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की। टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो हैरान रह गई। स्टॉक और पोर्टल रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया आया। कई बोरियों का वजन मानक से कम था।
इस फर्जीवाड़े के तहत 174 किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री की गई है और करोड़ों की हेराफेरी की कोशिश की गई है। जांच करने पर केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। हालांकि उन्होंने पोर्टल से रिकॉर्ड को मिटाने की भी कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। दोनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं.
हालांकि पेमेंट नहीं हुआ
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया है कि केंद्र प्रभारी और ऑपरेटर की मिलीभगत से धान की हेराफेरी की है, हालांकि, इस फर्जी धान का पेमेंट नहीं किया गया था। वहीं, ASP का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और घोटालों में बिचौलियों की भूमिका की जांच की जा रही है.” वहीं इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद धान खरीदी की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।