MP में राजनीति का नया खेल या कुछ और...मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विभाग CM के काम में डाल रहा अडंगा !

Edited By Desh Raj, Updated: 04 Jul, 2026 06:26 PM

minister kailash vijayvargiya s department stalling cm s initiatives

मध्यप्रदेश की राजनीति में अजीब ही खेल चल रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि प्रदेश के मुखिया के कामों में भी रुकावट डाली जा रही है, जी हां आप चौंक गए होगें लेकिन प्रदेश में कुछ ऐसा ही हो रहा है।

(भोपाल): मध्यप्रदेश की राजनीति में अजीब ही खेल चल रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि प्रदेश के मुखिया के कामों में भी रुकावट डाली जा रही है, जी हां आप चौंक गए होगें लेकिन प्रदेश में कुछ ऐसा ही हो रहा है। जानकारी के मुताबिक सीएम मोहन यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली नोटशीट भी अब रोकी जा रही है। अधिकारी इन नोटसीट को दबाकर बैठे हैं।  इन सबके बीच गौर करने वाली सबसे खास बात यह है कि सीएम की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली नोटशीट रोकने में प्रदेश का नगरीय विकास एवं आवास विभाग सबसे आगे है । इस विभाग के मंत्री और कोई नहीं बल्कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं।

जानकारी सामने आने पर सीएम मोहन यादव का दिखा  सख्त अंदाज

वही इस बारे में जानकारी सामने आने पर सीएम मोहन यादव का सख्त अंदाज देखने को मिला है। मुख्यमंत्री ने तुंरत इनके तुरंत निराकरण के निर्देश दिए हैं। इस काम के चलते  कई अधिकारियों को ऑफिस में देर रात तक भी रुकना पड़ा है । जिसके चलते शुक्रवार को रात 12 बजे के बाद भी कई आदेश जारी किए गए।

आपको बता दें  कि मुख्यमंत्री कार्यालय से लिखी ए-प्लस की नोटशीट पर अधिकतम 15 दिनों में निर्णय लेने का प्रावधान है,लेकिन इसका उल्लंघन किया जा रहा है।  एसीएस, पीएस जैसे अधिकारियों के काम पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि  2 महीनों  में ऐसी 700 से उपर नोटशीट हो गई थीं।

गौर करने वाली बात है कि इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नगरीय विकास एवं आवास विभाग सबसे अग्रणी है, यहां सबसे ज्यादा नोटशीट लंबित हैं। मंत्री विजय शाह के जनजातीय कार्य,  उदय प्रताप सिंह के स्कूल शिक्षा के साथ ही  मंत्री प्रहलाद पटेल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास भी नोटशीट को लेकर संजीदा नहीं है।

आपको बता दें किं  मोहन यादव की लिखी इन नोटशीट्स में सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जनता से जुड़े विकास के साथ ही शासकीय सेवकों के तबादलों शामिल हैं। बता दें पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर एक आरोप लगा था कि उन्होंने इंदौर में विकास की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सीएम मोहन यादव को एक पत्र लिखा था।

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