Edited By Himansh sharma, Updated: 23 Mar, 2026 04:37 PM

हमा गांव के घने जंगलों के बीच स्थित मां काली का यह सिद्ध मंदिर अपनी अलौकिक मान्यता के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है।
छतरपुर (राजेश चौरसिया): जिले के मुख्यालय से मात्र 6 किलोमीटर दूर हमा गांव के घने जंगलों के बीच स्थित मां काली का यह सिद्ध मंदिर अपनी अलौकिक मान्यता के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां मां काली दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलकर भक्तों को दर्शन देती हैं—सुबह बाल्य रूप, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्ध रूप में मां के दर्शन होते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों के अनुसार, यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां मां काली के तीन अलग-अलग स्वरूप एक ही स्थान पर अनुभव किए जाते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती और हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि देशभर से लोग यहां आकर मां के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं।
इस मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कहानी भी बेहद रोचक है। करीब 300 वर्ष पूर्व कोलकाता से मां काली की प्रतिमा को पुष्य नक्षत्र में यहां लाया जा रहा था। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र समाप्त होते ही मां की प्रतिमा उसी स्थान पर रुक गई, जहां आज यह मंदिर स्थित है। इसके बाद यहां विशाल यज्ञ और हवन का आयोजन किया गया, जिसमें मां कन्या रूप में प्रकट हुईं और उसी स्वरूप में मंदिर में विराजमान हो गईं।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध है। यहां आने वाला हर भक्त आस्था के साथ मां से कुछ न कुछ लेकर ही लौटता है। विशेषकर नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र मेले के रूप में बदल जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही मान्यता और अटूट श्रद्धा के चलते यह मंदिर आज भी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां मां काली की कृपा को हर भक्त महसूस करता है।