Edited By meena, Updated: 08 Aug, 2026 06:01 PM

मध्य प्रदेश के नीमच जिले से खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। डिकेन पुलिस चौकी के प्रभारी (सब इंस्पेक्टर) गजेंद्र चौहान पर दो डंपर चालकों को अवैध...
नीमच (मूलचंद खींची) : मध्य प्रदेश के नीमच जिले से खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। डिकेन पुलिस चौकी के प्रभारी (सब इंस्पेक्टर) गजेंद्र चौहान पर दो डंपर चालकों को अवैध हिरासत में रखने, उनके साथ मारपीट करने तथा वाहन छोड़ने के एवज में ₹50 हजार की रिश्वत मांगने के संगीन आरोप लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता उमराव सिंह गुर्जर एवं गुर्जर समाज के प्रतिनिधि देवा गुर्जर के नेतृत्व में पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी ने त्वरित जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामूली विवाद के बाद पुलिसिया उत्पीड़न का आरोप
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता चालक सावरा गुर्जर एवं प्रधान मीणा 6 अगस्त की रात करीब 10 बजे डंपर क्रमांक RJ09-GC-6566 से रतनगढ़ की ओर जा रहे थे। रास्ते में एक बस से डंपर की मामूली टक्कर हो गई थी, जिसे दोनों पक्षों ने मौके पर ही आपसी सहमति से सुलझा लिया था।
चालकों का आरोप है कि इसके बावजूद डिकेन चौकी प्रभारी गजेंद्र चौहान ने उनके वाहन को जबरन रुकवाया और उन्हें चौकी ले आए। पीड़ितों ने आवेदन में बताया कि रात करीब 12 बजे चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, पट्टे से बेरहमी से मारपीट की और डंपर छोड़ने के बदले ₹50 हजार की मांग की।
जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद छूटे चालक
बताया जा रहा है कि डंपर मालिक के पहुंचने पर पुलिस ने वाहन तो छोड़ दिया, लेकिन चालकों को हिरासत में ही रखा। अगले दिन जब इस घटनाक्रम की जानकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जिला पंचायत अध्यक्ष को हुई, तब उनके हस्तक्षेप और प्रशासनिक दबाव के बाद पुलिस ने दोनों चालकों को छोड़ा। शनिवार को पीड़ितों ने बीजेपी नेताओं के साथ नीमच कंट्रोल रूम पहुंचकर पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास को लिखित शिकायत सौंपी। पीड़ितों ने डिकेन चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

एसपी ने दिए निष्पक्ष जांच और मेडिकल के आदेश
मामले पर त्वरित संज्ञान: शिकायत मिलते ही नीमच एसपी राजेश व्यास ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों चालकों, सावरा और प्रधान को तत्काल जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। एसपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दे दिए गए हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।