Edited By Vandana Khosla, Updated: 06 May, 2026 06:06 PM

दुर्ग (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के बोरी क्षेत्र में एक बार फिर अवैध रेत खनन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिवनाथ नदी के डोमा पथरिया घाट में देर रात भारी मशीनों से कथित रूप से रेत उत्खनन किए जाने का मामला सामने आया है।...
दुर्ग (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के बोरी क्षेत्र में एक बार फिर अवैध रेत खनन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिवनाथ नदी के डोमा पथरिया घाट में देर रात भारी मशीनों से कथित रूप से रेत उत्खनन किए जाने का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि क्षेत्र की सियासत भी गरमा गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में चेन माउंटेन मशीनों के जरिए खुलेआम रेत निकाली जा रही थी। जब गांव के लोगों को इसकी भनक लगी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण घाट पहुंच गए। ग्रामीणों के पहुंचते ही मौके पर मौजूद कथित रेत कारोबारी मशीनें छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि ग्रामीण इस पूरे मामले में स्थानीय राजनीतिक संरक्षण की बात कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने साजा विधायक ईश्वर साहू और निज सहायक सचिव अनुज वर्मा उनके करीबी लोगों के नाम लेते हुए संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। लंबे समय से शिवनाथ नदी के घाटों से कथित तौर पर अवैध खनन जारी है, लेकिन खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। सवाल उठ रहा है कि जब नदी घाटों में भारी मशीनें उतर रही थीं, तब जिम्मेदार विभाग आखिर कर क्या रहे थे? मामले में फर्जी माइनिंग परमिशन दिखाकर ग्रामीणों को डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि कथित तौर पर खनिज विभाग के नाम पर दस्तावेज दिखाकर अवैध खनन को वैध बताने की कोशिश की गई। यदि यह सही है, तो यह सिर्फ अवैध खनन नहीं बल्कि प्रशासनिक सिस्टम को चुनौती देने जैसा मामला बन सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सत्ता के संरक्षण में नदी का सीना छलनी किया जा रहा है, या फिर जिम्मेदार विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं? डोमा घाट में उठी ग्रामीणों की आवाज अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।