Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Oct, 2026 07:17 PM

राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
भोपाल। राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बालाघाट कलेक्टर और एसपी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को लेकर पलटवार करते हुए पटवारी के बयान को प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
दरअसल, राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के दौरान कांग्रेस की ओर से बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात और उनकी समस्याएं सुनने की बात कही गई। इसी दौरान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के लिए निर्धारित संसाधनों और पैसों का इस्तेमाल राजनीतिक आयोजनों में किया जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा।
पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के दौरान जिले के कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी अपेक्षित थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक दोनों अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर मुख्य सचिव से भी बातचीत की गई, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी वहां मौजूद नहीं हुए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मामला बताते हुए कहा कि पार्टी जरूरत के मुताबिक संबंधित स्थानों पर शिकायत करेगी। उन्होंने अधिकारियों के कार्य व्यवहार को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। पटवारी ने कहा कि कलेक्टर और एसपी की भूमिका को लेकर कांग्रेस आगे कार्रवाई करेगी और जहां आवश्यकता होगी, वहां शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
बीजेपी ने कांग्रेस पर किया पलटवार
कांग्रेस के आरोपों के बाद बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कई मौकों पर प्रशासन पर दबाव बनाने और अधिकारियों को धमकाने की राजनीति करती रही है।
बीजेपी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। पार्टी ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि कलेक्टर या एसपी को लेकर कोई औपचारिक शिकायत, आवेदन या प्रतिवेदन दिया गया था तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस जहां अधिकारियों की जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी कांग्रेस के आरोपों के आधार पर और दस्तावेज सामने रखने की मांग कर रही है। राहुल गांधी के बालाघाट दौरे से शुरू हुआ यह विवाद अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।