Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Sep, 2026 12:25 PM
मध्य प्रदेश में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवकों की भागीदारी को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बयान पर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है।
सागर। मध्य प्रदेश में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवकों की भागीदारी को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बयान पर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। अब खुरई से कांग्रेस नेता अंशुल परिहार ने इस बयान के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को स्पीड पोस्ट के जरिए खुला पत्र भेजा है। रामेश्वर शर्मा ने गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवकों की मौजूदगी को लेकर कहा था कि मुस्लिम गरबा में आएं तो अपनी बहन-बेटियों को भी साथ लेकर आएं और उनके बयान के अंत में "हमारे भी घोड़े तैयार हैं जैसी टिप्पणी सामने आई थी। इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई।
अंशुल परिहार ने अपने पत्र में कहा कि वह यह पत्र केवल कांग्रेस नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक हिंदू, सनातनी और भारतीय के तौर पर लिख रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी धर्म की महिलाओं और बेटियों को राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बनाना उचित है या नहीं।
‘क्या यही हिंदुत्व है?’
खुले पत्र में अंशुल परिहार ने रामेश्वर शर्मा के बयान का संदर्भ देते हुए भाजपा नेतृत्व से सवाल किया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को किसी समुदाय की बहन-बेटियों को लेकर इस तरह की भाषा इस्तेमाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार हिंदुत्व का अर्थ महिलाओं का सम्मान और कमजोरों की रक्षा करना है, न कि किसी समुदाय की महिलाओं को लेकर डर या असहजता पैदा करने वाली भाषा का इस्तेमाल करना।
पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा और संघ नेतृत्व तक से सवाल किए गए हैं। अंशुल परिहार ने पूछा कि यदि यह बयान भाजपा की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, तो पार्टी नेतृत्व को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि रामेश्वर शर्मा को पार्टी नेतृत्व तलब करे और उनसे सार्वजनिक स्पष्टीकरण लिया जाए। साथ ही भाजपा यह स्पष्ट करे कि विधायक द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पार्टी की नीति या विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
उन्होंने यह भी मांग रखी कि यदि बयान किसी कानून का उल्लंघन करता है तो मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा भविष्य में किसी नेता द्वारा महिलाओं या किसी समुदाय की बहन-बेटियों को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल न हो, इसके लिए स्पष्ट संदेश दिए जाने की मांग की गई है।
‘सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं’
खुले पत्र में अंशुल परिहार ने कहा कि मामला केवल एक नेता के बयान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं की सार्वजनिक भाषा और महिलाओं के सम्मान से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन महिलाओं की गरिमा को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से यह भी पूछा कि यदि रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी पार्टी की स्वीकार्य भाषा नहीं है तो नेतृत्व की ओर से इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया और कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कांग्रेस नेताओं ने जताया समर्थन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पत्र को कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि आशु भाई जान, वरिष्ठ नेता लक्ष्मीकांत ताम्रकार, वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर मैसन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एडवोकेट डीपी रैकदास, हिम्मत सिंह रघुवंशी, गणेश मैसन, आसिफ खान, अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष इमरान खान, यंग ब्रिगेड अध्यक्ष शाकिर राईन और विजय सोलंकी समेत अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला है।
इस पूरे मामले के बीच गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। रामेश्वर शर्मा के बयान पर कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले भी प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है। अब खुरई से भेजे गए इस खुले पत्र के जरिए कांग्रेस नेता ने भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व से इस बयान पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग उठाई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है।