Edited By meena, Updated: 28 Sep, 2026 02:08 PM

छतरपुर जिले में इस बार बारिश का आंकड़ा औसत करीब 45 इंच तक पहुंच गया है। लगातार और असमय बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ सीजन में बोई गई तिल...
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : छतरपुर जिले में इस बार बारिश का आंकड़ा औसत करीब 45 इंच तक पहुंच गया है। लगातार और असमय बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ सीजन में बोई गई तिल, उड़द और मूंगफली की फसल को अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से कहीं तिल की फसल सड़कर काली पड़ गई, तो कहीं उड़द की फलियों में ही दाने अंकुरित होकर खराब हो गए। मूंगफली के खेतों में भी जलभराव के कारण फसल खराब होने की स्थिति है।
नौगांव क्षेत्र में मूंगफली की सबसे ज्यादा बोवनी होने के कारण यहां नुकसान का असर भी व्यापक बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल बर्बाद होने से उनके सामने भरण-पोषण के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की बोवनी के लिए खाद-बीज खरीदने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से खराब फसलों का सर्वे कराकर जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है।
खेत में ही काली पड़ गई तिल की फसल
नौगांव विकासखंड में इस खरीफ सीजन में करीब 4,700 हेक्टेयर में तिल की बोवनी की गई थी। किसानों के अनुसार शुरुआत में फसल अच्छी थी, लेकिन पकने के समय लगातार बारिश होने से खेतों में खड़ी तिल की फसल सड़ने लगी। पौधे काले पड़ गए और फलियां व पत्ते भी झड़ने लगे। गलान गांव के किसान सीताराम यादव ने बताया कि लगातार बारिश और धूप नहीं निकलने से खेत में खड़ी तिल की फसल काली पड़ गई है। यही स्थिति गांव के अन्य किसानों की भी है। सरसेड़ के किसान घासीराम यादव ने बताया कि बारिश से तिल खेत में ही काली पड़ गई। कुछ जगह धूप निकलने के बाद पौधे खेत में ही झड़ गए। इमलिया के किसान दीपचंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने कम बारिश की आशंका में करीब 30 बीघा में तिल की बोवनी की थी, लेकिन अब तिल और उड़द दोनों की फसल खराब हो गई है।
पकने के बाद बारिश में भीगी उड़द, दाने पड़े काले
नौगांव विकासखंड में इस बार करीब 32 हजार हेक्टेयर में उड़द की बोवनी की गई थी। किसानों के मुताबिक फसल अच्छी थी, लेकिन पकने के समय लगातार बारिश होने से पौधे खेत में झुक गए और फलियां पानी में डूब गईं। कई खेतों में फलियों के अंदर ही दाने अंकुरित हो गए, जबकि कई जगह दाने काले पड़ गए। काकुनपुर गांव के किसान राम सिंह ने बताया कि उड़द की फसल पक चुकी थी। उन्होंने फसल काटकर सुखाने के लिए रखी थी, लेकिन पिछले तीन दिनों की बारिश के कारण फलियों के अंदर ही दाने काले पड़कर खराब हो गए।
खेतों में पानी भरने से मूंगफली की फसल पर भी संकट
किसानों को तिल और उड़द के बाद मूंगफली की फसल से उम्मीद थी, लेकिन लगातार बारिश से मूंगफली के खेतों में भी पानी भर गया। इससे फसल खराब होने लगी है। नौगांव विकासखंड में करीब 48,542 हेक्टेयर में मूंगफली की बोवनी की गई थी, जो जिले में सबसे बड़ा रकबा बताया जा रहा है। सरसेड़, देवथा, कैथोकर, कराठा, गलान, लहदरा, इमलिया, रगौली, चिरवाई, जोरन, अमां और रानीपुरा क्षेत्र के किसानों ने बताया कि लगातार बारिश और जलभराव के कारण खेतों में फसल को नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक मूंगफली दाने पर थी, लेकिन खेत में पानी भरने से दाने कमजोर और छोटे होने की आशंका है। कई जगह दाने अंकुरित होने और काले पड़ने की स्थिति भी सामने आ रही है। काकुनपुरा निवासी किसान रतिराम कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ में मूंगफली की बोवनी की थी। अतिवृष्टि के कारण पूरी फसल खराब हो चुकी है। खेतों में पानी भरा होने से अब फसल बचने की उम्मीद भी नहीं है।

खरीफ की फसल गई, अब रबी की बोवनी की चिंता
किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की फसल खराब होने से अब रबी सीजन की बोवनी के लिए खाद और बीज खरीदना मुश्किल होगा। कई किसानों ने खरीफ की फसल के लिए कर्ज लिया था। फसल खराब होने के बाद कर्ज चुकाने के साथ परिवार के भरण-पोषण की चिंता भी खड़ी हो गई है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का जल्द सर्वे कराया जाए और पात्र किसानों को मुआवजा दिलाया जाए, ताकि वे रबी सीजन की बोवनी कर सकें।
कृषि विभाग ने कहा- फसल बीमा वाले किसान तत्काल सूचना दें
सूरजभान पटेल, कृषि विकास अधिकारी, नौगांव ने बताया कि अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान होने की जानकारी सामने आई है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वे फसल खराब होने की सूचना संबंधित टोल-फ्री नंबर पर दें। खराब फसलों के सर्वे और मुआवजा संबंधी कार्रवाई राजस्व विभाग द्वारा की जाएगी।