Edited By Vandana Khosla, Updated: 08 Aug, 2026 04:16 PM

सीधी (सूरज शुक्ला): शिक्षा को मंदिर कहा जाता है, जहां बच्चों का भविष्य संवरता है। लेकिन सीधी जिले के सिहावल जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम डिहुली नंबर-4 के प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां पढ़ाई से ज्यादा चर्चा एक...
सीधी (सूरज शुक्ला): शिक्षा को मंदिर कहा जाता है, जहां बच्चों का भविष्य संवरता है। लेकिन सीधी जिले के सिहावल जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम डिहुली नंबर-4 के प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां पढ़ाई से ज्यादा चर्चा एक ऐसे शिक्षक की हो रही है, जिस पर स्कूल परिसर में शराब पीने, नशे की हालत में बच्चों के बीच पहुंचने और नियमित रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप लगे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन आरोपों की चर्चा केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि सहायक शिक्षक, संकुल प्राचार्य और स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इसकी शिकायत वर्षों से की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पंजाब केसरी की टीम जब गुरुवार को मौके पर पहुंची तो कई ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से खुला मामला
पूरा मामला तब सामने आया जब गांव के निवासी गयासुद्दीन अंसारी अचानक विद्यालय पहुंच गए। उनका आरोप है कि उन्होंने शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल को स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा। उन्होंने शिक्षक को ऐसा करने से रोका और घटना का वीडियो भी बना लिया। यही वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद पंजाब केसरी की टीम ने गांव पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की।
स्कूल के कमरे में सोते मिले शिक्षक
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित इस प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ हैं— दिनेश प्रसाद कोल और अशोक कुमार शर्मा। जब पंजाब केसरी की टीम स्कूल पहुंची तो दिनेश प्रसाद कोल स्कूल के कमरे के अंदर लेटे हुए मिले। टीम के अनुसार शिक्षक नशे की हालत में दिखाई दे रहे थे। उन्हें उठाने पर वे लड़खड़ाते हुए खड़े हुए और कहा कि उन्होंने शराब नहीं पी है बल्कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, इसलिए वे आराम कर रहे थे।
कुछ देर बाद शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड के पास पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने सीधी के जिला कलेक्टर विकास मिश्रा के स्थान पर "मनीष मिश्रा" लिख दिया और बच्चों को पढ़ाने लगे। यह दृश्य भी मौके पर मौजूद लोगों ने देखा।
बच्चों का दावा- 'रोज शराब पीकर आते हैं'
विद्यालय में पढ़ने वाले कई बच्चों ने बताया कि शिक्षक अक्सर शराब के नशे में स्कूल आते हैं। बच्चों के अनुसार, कई बार शिक्षक कक्षा में ही गिर जाते हैं। कभी बच्चों के ऊपर गिर पड़ते हैं तो कभी कक्षा में उल्टी भी कर देते हैं। बच्चों ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते।
बच्चों की बातें केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या की ओर इशारा करती हैं।
सहायक शिक्षक ने खोले दो साल पुराने राज
विद्यालय में पदस्थ दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा ने भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि वे पिछले करीब दो वर्षों से इस स्थिति को देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिनेश प्रसाद कोल अधिकांश दिनों में शराब पीकर स्कूल आते हैं। महीने में लगभग 24 दिन स्कूल खुलता है, लेकिन वे मुश्किल से दो या तीन दिन ही विद्यालय पहुंचते हैं। जब भी आते हैं तो नशे की हालत में रहते हैं, गाली-गलौज करते हैं और पढ़ाने के बजाय स्कूल में ही सो जाते हैं।
अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार संकुल प्राचार्य और बीआरसी कार्यालय को शिकायत दी। इतना ही नहीं, उन्होंने उपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक उपस्थिति कम होने के बावजूद शिक्षक को पूरा वेतन मिलता रहा।
'मेरे छुट्टी पर जाते ही स्कूल बंद हो जाता है'
अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यालय की पूरी जिम्मेदारी लगभग अकेले उनके ऊपर आ गई है। यदि वे किसी विभागीय कार्य या अवकाश पर चले जाते हैं तो विद्यालय बंद करने की नौबत आ जाती है। उन्होंने बताया कि एक समय इस विद्यालय में लगभग 200 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब विद्यार्थियों की संख्या घटकर सिर्फ 28 रह गई है। उनके अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण विद्यालय की खराब छवि और शिक्षण व्यवस्था है।
संकुल प्राचार्य बोले- वीडियो देखा, लेकिन कार्रवाई नहीं की
इस पूरे मामले में संकुल प्राचार्य टीकर सुरेश प्रसाद कोल ने स्वीकार किया कि उन्होंने वायरल वीडियो देखा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को कई बार मौखिक रूप से समझाया गया, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। उनका कहना है कि वे भी लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि संबंधित शिक्षक शराब पीकर विद्यालय आते हैं।
संकुल प्राचार्य ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी या अन्य जिम्मेदार अधिकारी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं करते। यदि समय-समय पर निरीक्षण होता तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
शिक्षक का अजीब दावा- 'डॉक्टर ने शराब पीने की सलाह दी'
जब इस पूरे मामले में शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल से बातचीत की गई तो उन्होंने शराब पीने की बात स्वीकार की, लेकिन इसके पीछे एक अलग ही तर्क दिया। उन्होंने कहा कि वे कभी-कभार शराब पीते हैं क्योंकि उन्हें डॉक्टर ने ऐसा करने की सलाह दी है। उनका दावा था कि वे ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और सतना की एक डॉक्टर ने कहा है कि शराब पीने से वे ठीक से काम कर पाएंगे और लिख-पढ़ सकेंगे।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे शराब की बोतल स्कूल लेकर आते हैं। हालांकि उनका कहना था कि वे हमेशा स्कूल में शराब नहीं पीते, कभी-कभार ही पीते हैं।हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ सामान्य तौर पर शराब को किसी भी प्रकार के नियमित उपचार के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं और शिक्षक के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
हाजिरी और वेतन पर भी उठे सवाल
इस मामले में एसीएस दिवाकर प्रसाद शुक्ला ने कहा कि उन्हें जो उपस्थिति विवरण संकुल प्राचार्य की ओर से भेजा जाता है, उसी के आधार पर वेतन की प्रक्रिया होती है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित शिक्षक पिछले महीने केवल चार दिन विद्यालय पहुंचे थे, जबकि उपस्थिति 24 दिन की भेजी गई थी। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यह बयान उपस्थिति और वेतन भुगतान की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल केवल एक शिक्षक का नहीं, पूरी व्यवस्था का
डिहुली नंबर-4 का यह मामला केवल एक शिक्षक के शराब पीने तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था, निरीक्षण प्रणाली और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि सहायक शिक्षक के अनुसार दो वर्षों से शिकायतें होती रहीं, यदि संकुल प्राचार्य भी इस स्थिति से अवगत थे, यदि ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी थी और फिर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता मानी जाएगी। विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 200 से घटकर 28 रह जाना भी इस बात का संकेत है कि अभिभावकों का सरकारी शिक्षा व्यवस्था से भरोसा लगातार कम हो रहा है।
अब जांच और कार्रवाई का इंतजार
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और पंजाब केसरी की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद अब पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के साथ-साथ उपस्थिति और वेतन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन हाथों में बच्चों का भविष्य सौंपा गया है, यदि वही हाथ शराब की बोतल थामे नजर आएं और वर्षों तक व्यवस्था आंखें मूंदे रहे, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? अब नजरें इस बात पर हैं कि शिक्षा विभाग केवल जांच का आश्वासन देता है या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी करता है।