MP हाइकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, प्रमुख सचिव राजस्व को नोटिस जारी, झूठा हलफनामा दाखिल करने पर कड़ा एक्शन

Edited By Desh Raj, Updated: 11 Mar, 2026 03:03 PM

the high court has issued a notice to the principal secretary of revenue

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को नोटस जारी कर दिया है। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव राजस्व विवेक कुमार पोरवाल को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना...

(ग्वालियर): मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को नोटस जारी कर दिया है। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव राजस्व विवेक कुमार पोरवाल को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस नोटिस से हड़कप मचा हुआ है।  दरअसल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन से जुड़े मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व विवेक कुमार पोरवाल को नोटिस जारी कर दिया है और उनसे पूछा है कि अदालत में झूठा हलफनामा पेश करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

राज्य सरकार और अधिकारी सरकारी जमीन के मालिक नहीं केवल ट्रस्टी-कोर्ट

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी सरकारी जमीन के मालिक नहीं हैं, वो केवल जमीन के ट्रस्टी हैं, और इनका दायित्व है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें।कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से ऐसा लगता है कि अधिकारी कई वर्षों तक फाइलों को दबाकर बैठे रहे और जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक कर्मचारी पर पूरा दोष डालने की कोशिश की गई। इसलिए संदेह होता है कि कहीं अधिकारी निजी व्यक्तियों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर देर तो नहीं कर रहे।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा दायर अतिरिक्त स्टेटस रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई गई। अदालत ने पाया कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन अधिकारियों की गलती से वर्षों तक मामला लंबित रहा। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि कलेक्टर ग्वालियर की रिपोर्ट पर केवल कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई, जबकि अन्य अधिकारियों को क्यों जिम्मेदारी से बाहर किया गया।

क्या है मामला

दरअसल दीनारपुर में सीलिंग की 9 बीघा जमीन को लेकर उपजा ये सारा मामला है। सिविल न्यायालय में शासन ये केस हार गया था। इसके बाद 2008 में पहली अपील दायर की, लेकिन यह अपील अदम पैरवी के चलते 2012 में खारिज हो गई। लेकिन बाद में इस अपील को सुनवाई में लाने के वास्ते 2019 में आवेदन पेश किया। कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। वहीं खास और गौर करने वाली बात है कि  कोर्ट ने गलत हलफनामा दाखिल करके गुमराह करने के प्रयास मे पहले भी उन पर जुर्माना लगाया चुका है।

वहीं कलेक्टर ग्वालियर की रिपोर्ट के मुताबिक चार अधिकारियों को जिम्मेदार बताया गया है। इनमें से दो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, बाकी दो के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। लिहाजा अब हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को नोटिस जारी करके पूछा है  कि क्यों अब अवमानना की कार्रवाई शुरु न की जाए। 12 मार्च को याचिका पर फिल से सुनवाई होगी।

 

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