Edited By Desh sharma, Updated: 18 Oct, 2025 03:35 PM

ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पटवारी भर्ती मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने बिलकुल साफ कर दिया है कि 1 जनवरी 2005 के पहले की भर्ती वालों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ देना होगा।
(ग्वालियर): ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पटवारी भर्ती मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने बिलकुल साफ कर दिया है कि 1 जनवरी 2005 के पहले की भर्ती वालों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ देना होगा। दरअसल पटवारी अवधेश सिंह भदौरिया सहित अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कहा था कि याचिकाकर्ता वर्ष 2003 के पटवारी भर्ती विज्ञापन के आधार पर चयनित हुए थे और 2004 तक उनका प्रशिक्षण एवं मेडिकल प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी लेकिन इसके बाद भी नयी पेंशन योजना में डाल दिया गया।
क्योंकि नियुक्ति आदेश दिसंबर 2005 में जारी किए और नयी पेंशन योजना में डाला गया जबकि कई दूसरे अभ्यर्थियों को उसी चयन प्रक्रिया में के तहत 1 जनवरी 2005 से पहले नियुक्ति देकर पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया गया है। वहीं मामले को लेकर राज्य सरकार ने जबाव दिया कि नियुक्ति पत्र उपलब्ध पदों के आधार पर समय-समय पर जारी किए गए, कट ऑफ डेट के बाद नियुक्त होने वालों को न्यू पेंशन स्कीम में रखा गया।
हाईकोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और कहा कि यदि अभ्यर्थी की नियुक्ति में देरी विभागीय कारणों से हुई है, तो उसका नुकसान कर्मचारी पर नहीं थोपा जा सकता। लिहाजा 1 जनवरी 2005 के पहले भर्ती वालों तो कोर्ट ने बड़ी राहत और अहम फैसला दिया है।
जब प्रशिक्षण 1 जनवरी 2005 से पहले पूरा हो चुका था तो नियुक्ति आदेश में देरी की वजह से अभ्यर्थी को पुरानी पेंशन योजना के लाभों से महरुम नहीं किया जा सकता।