Edited By Vikas Tiwari, Updated: 15 Feb, 2026 04:04 PM

मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा स्थित नवग्रह पीठ पर आयोजित ‘अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में शनिवार को प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भारतीय संस्कृति, प्रेम और अध्यात्म पर विस्तार से अपने विचार रखे।
डबरा (भरत रावत): मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा स्थित नवग्रह पीठ पर आयोजित ‘अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में शनिवार को प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भारतीय संस्कृति, प्रेम और अध्यात्म पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हर पल प्रेम करना सिखाती है, जबकि पाश्चात्य संस्कृति में प्रेम के लिए भी एक विशेष दिन निर्धारित किया गया है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि पश्चिमी परंपरा को प्रेम व्यक्त करने के लिए 14 फरवरी जैसे वेलेंटाइन डे की जरूरत पड़ती है, लेकिन हमारी संस्कृति में प्रेम ही आधार है और परिवार को जोड़ने का माध्यम है।
डॉ. विश्वास ने कहा कि राम कथा हमें सिखाती है कि प्रेम ही परिवार की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने भगवान राम के विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि राम पर संदेह नहीं करना चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है तो उसकी बातों से विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने परिवार में आपसी सम्मान और प्रेम पर जोर देते हुए कहा कि बड़ा भाई छोटे भाई को स्नेह और सम्मान दे, जबकि छोटा भाई बड़े भाई का आदर करे। ऐसा करने से हर घर अयोध्या बन सकता है।
देखिए कुमार विश्वास की 'अपने अपने राम' कथा
कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के अध्यात्म की ओर बढ़ते रुझान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का झुकाव आध्यात्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है। कथाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल हो रहे हैं। डॉ. कुमार विश्वास ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह 18 वर्ष की आयु में ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी होता है, उसी तरह 18 वर्ष की उम्र से ही अध्यात्म का ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ ले लेना चाहिए, ताकि अपनी संस्कृति और मूल्यों की सही समझ विकसित हो सके।