Edited By meena, Updated: 07 Feb, 2026 07:03 PM

मध्यप्रदेश में भाजपा की डॉ. मोहन यादव सरकार ने बजट सत्र से पहले ही आज 7 फरवरी को 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। नए साल में यह दूसरी बार है जब राज्य सरकार अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए कर्ज ले रही...
भोपाल : मध्यप्रदेश में भाजपा की डॉ. मोहन यादव सरकार ने बजट सत्र से पहले ही आज 7 फरवरी को 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। नए साल में यह दूसरी बार है जब राज्य सरकार अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए कर्ज ले रही है। इससे पहले 7 जनवरी को सरकार 4000 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश की जनता पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि एक वित्त वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन भाजपा सरकार अब तक 15 बार कर्ज ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कर्ज प्रदेश की विकास परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय सरकार के ढांचे को संचालित करने और कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के भुगतान के लिए लिया जा रहा है। माकपा नेता ने कहा कि एक ओर प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिसे अंतत: जनता से कर वसूल कर चुकाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर यह धन नेताओं, मंत्रियों, अफसरशाही और दलालों की तिजोरियों तक पहुंच रहा है।
जसविंदर सिंह ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए बजट के समय ही प्रदेश का कर्ज बजट से अधिक था। उस समय प्रदेश पर कर्ज 4.65 लाख करोड़ रुपये था, जबकि बजट का आकार 4.21 लाख करोड़ रुपये का था। अब कर्ज बढ़कर 5.27 लाख करोड़ रुपये हो जाना इस बात का संकेत है कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर प्रदेश को कर्ज के जाल में फंसाती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के बजट सत्र से पहले कर्ज लेना इस बात को दर्शाता है कि भाजपा सरकार के लिए न तो विधानसभा का सम्मान है और न ही बजट की कोई अहमियत। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर राज्य सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।