सरकार ने फिर लिया 5 हजार करोड़ का कर्ज, कमलनाथ बोले- भाजपा ने MP को कर्ज प्रदेश बना दिया

Edited By meena, Updated: 11 Feb, 2026 01:14 PM

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मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले मोहन सरकार ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठा लिया है। यह पिछले एक सप्ताह में लिया गया दूसरा बड़ा कर्ज है...

भोपाल (इजहार खान) : मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले मोहन सरकार ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठा लिया है। यह पिछले एक सप्ताह में लिया गया दूसरा बड़ा कर्ज है। इससे पहले 4 फरवरी को सरकार 5300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरु कर दिया है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने मोहन सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाए हैं कि भाजपा राज्य को कर्ज के बोझ में डूबो रही है।

पूर्व सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा- भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने मध्य प्रदेश को कर्ज़ प्रदेश बना दिया है। भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के ऊपर 5, लाख करोड़ रुपया से अधिक का कर्ज़ हो चुका है और मध्य प्रदेश के ऊपर देश के कुल कर्ज़ का 5% हिस्सा हो गया है। भाजपा की सरकार ने कितनी तेज़ी से मध्य प्रदेश को कर्ज़ के दलदल में डुबाया है, इस बात का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2007 में मध्यप्रदेश के ऊपर 52, हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ था जो क़रीब दस गुना बढ़कर 5,00,000 करोड़ की सीमा को पार कर गया है।

भाजपा सरकार अपनी फ़िज़ूलख़र्ची और इवेंट बाज़ी पर सरकारी ख़ज़ाने को लुटा रही है। आम जनता कभी कफ सीरप में ज़हर, तो कभी विषाक्त जल पीने से बेमौत मारी जा रही है और सरकारी ख़ज़ाना बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति की जगह भ्रष्टाचार पर ख़र्च किया जा रहा है। उन्होंने आगे लिखा कि – मैंने पहले भी आगाह किया है और एक बार फिर दोहराता हूं कि मध्य प्रदेश सरकार को अपनी राजकोषीय स्थिति के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए और जनहित में इसमें सुधार करने की ज़रूरत है।

दरअसल, मोहन सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से तीन अलग-अलग किस्तों में यह कर्ज लिया है, जो बुधवार को भुगतान के रूप में सरकार के खाते में आ जाएगा। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में अब तक लिए गए कुल कर्ज की संख्या 36 हो गई है और कुल उधारी का आंकड़ा 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जनवरी 2026 तक सरकार 30 बार बाजार से कर्ज ले चुकी थी। 3 फरवरी को तीन नए कर्ज लेने के बाद यह आंकड़ा 33 तक पहुंचा और अब 10 फरवरी को फिर तीन किस्तों में उधारी के साथ कुल संख्या 36 हो गई है। महज दस दिनों में छह बार कर्ज लेने से वित्तीय प्रबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

10 फरवरी को लिए गए 5 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इनमें से दो-दो हजार करोड़ रुपये के दो कर्ज क्रमशः 21 साल और 16 साल की अवधि के लिए लिए गए हैं। वहीं, 1000 करोड़ रुपये का तीसरा कर्ज 8 साल की अवधि का है। इस पर सरकार को छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करना होगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह उधारी विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने का हिस्सा है और वित्तीय अनुशासन के दायरे में रहकर ही कर्ज लिया जा रहा है।

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