चर्च की स्टाईल मे बना पन्ना मे अनोखा मंदिर, जहां कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ की होती है पूजा

Edited By Vikas kumar, Updated: 09 Aug, 2020 01:26 PM

unique temple in panna built in the style of the church

भगवान श्री कृष्ण के मंदिर पूरी दुनिया में हर जगह मिल जाते हैं। लेकिन उनके दाउ भैया को पूजने वाले कम ही लोग नजर आते हैं, और शायद ही कहीं इनके मंदिर मिलें, पर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल....

पन्ना: भगवान श्री कृष्ण के मंदिर पूरी दुनिया में हर जगह मिल जाते हैं। लेकिन उनके दाउ भैया को पूजने वाले कम ही लोग नजर आते हैं, और शायद ही कहीं इनके मंदिर मिलें, पर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में पन्ना जिले में चर्च की स्टाईल पर बना एक अनोखा मंदिर है, जिसमें पाश्चात्य और बुन्देली स्थापत्य कला को समेटे गर्भ ग्रह में हलधर भगवान विराजमान हैं।

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पन्ना का महत्व शुरू से ही धर्मिक रहा है। यहां पर र्धामिक आयोजन बड़े धूमधाम से मनाये जाते हैं। उसी के तहत आज भादों माह की छठी के दिन कृष्ण के बड़े भाॅई बल्दाउ जी का जन्म पन्ना की पवित्र नगरी में बड़े धूमधाम से मनाया गया। क्या बड़ा-क्या छोटा, सभी भक्ति भाव में रस विभोर रहते हैं। यह राजशाही जमाने का मंदिर है जिसे राजा रूद्रप्रताप ने बनाया था। इसमें 16 गुम्बद, 16 झरोखे, 16 श्रीणी, 16 खिड़कियां लगी हुई हैं। बताया जाता है कि राजा को खेती से बड़ा लगाव था। इसी कारण से राजा ने यह मंदिर बनवाया था।

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लंदन के सेंटपॉल चर्च की तरह दिखता है मंदिर...
यह मंदिर लंदन के सेंटपाॅल चर्च की स्टाईल का मंदिर है। जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस जन्मोत्सव के कार्यकृम में मंदिर को भी दुल्हन की तरह सजाया गया है। पूजन और कार्यक्रम में पन्ना राजधराने के सदस्य भी शामिल होते हैं। प्रशासन की ओर से प्रशासनिक अधिकारी भी देख-रेख में लगाये गये हैं। औरतें बुदेलखण्ड के प्रसिद्ध गान सोहरे भी गातीं और नाचती हैं। साथ ही लोग भगवान से अच्छी खेती के लिये कामना करते हैं। यह मंदिर पन्ना के राजा महाराजा रूद्र प्रताप ने सन 1933 में बनवाया था। हालांकि मंदिर के जानकार बताते हैं कि ये बुन्देली स्थापत्य का अनूठा मंदिर है ऐसा मंदिर पूरे विश्व में कहीं विराजित नहीं हैं। बता दें कि हरछठ में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस दिन मां अपने बच्चे की लम्बी आयु के लिये यह व्रत रखतीं हैं। हरछठ के दिन महिलाएं छठि की पूजा करती हैं। वर्ष के सबसे बड़े इस आयोजन में सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल होतीं हैं। किसी ने घर परिवार बच्चों के लिए वरदान मांगा तो किसी ने सर्वहित और राष्ट्रहित और रक्षा के लिए कामनाएं कीं। लोग खेती की शुरुआत इसी मंदिर से पूजन करके करते हैं मान्यता है कि इसी कारण से इस क्षेत्र में खेती-पाती अच्छी होती है।

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