मंदिर में अचानक बालिकाओं को आईं माता! खाना-पीना छोड़ रोने लगीं

Edited By Himansh sharma, Updated: 22 Mar, 2026 06:11 PM

sudden divine presence in temple girls stop eating break down in tears

धमधा नगर के प्रसिद्ध त्रिमूर्ति महामाया मंदिर से सटे गोड समाज का प्राचीन महलनुमा मंदिर इन दिनों आस्था और अधिकार के टकराव को लेकर चर्चा में है

धमधा (हेमंत पाल):  धमधा नगर के प्रसिद्ध त्रिमूर्ति महामाया मंदिर से सटे गोड समाज का प्राचीन महलनुमा मंदिर इन दिनों आस्था और अधिकार के टकराव को लेकर चर्चा में है। वर्षों से यह स्थल गोड समाज की धार्मिक और सामाजिक पहचान का केंद्र रहा है। हर वर्ष चैत्र नवरात्रि पर यहां माता की ज्योति स्थापना की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन इस बार समाज के दो गुटों के बीच विवाद के कारण ज्योति प्रज्वलित नहीं हो सकी।

हालांकि, इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे क्षेत्र को भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। धमधा के ऐतिहासिक त्रिमूर्ति महामाया मंदिर परिसर से लगा यह प्राचीन गोड समाज का महल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है। समाज के बड़े धार्मिक आयोजन, बैठकें और नवरात्रि जैसे पर्व यहीं से संचालित होते रहे हैं।

चैत्र नवरात्रि पर हर वर्ष विधि-विधान से घटस्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलन की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन इस बार मंदिर के प्रबंधन और अधिकार को लेकर समाज दो भागों में बंट गया। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे को सही ठहराते हुए मंदिर की व्यवस्था अपने हाथ में लेना चाहते थे। इसी खींचतान के चलते मंदिर का ताला नहीं खुल पाया और माता की ज्योति स्थापना रुक गई। जैसे ही यह खबर फैली, मंदिर परिसर में मौजूद महिलाओं और बालिकाओं के बीच भावनात्मक माहौल बन गया।

PunjabKesariकई महिलाएं और बालिकाएं भक्ति में डूबकर रोने लगीं। कुछ ने भोजन तक त्याग दिया। उपस्थित लोगों का कहना था कि यह देवी का आवेश है। देखते ही देखते वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया  कहीं भजन-कीर्तन, कहीं देवी गीत, तो कहीं श्रद्धालुओं की आंखों से बहते आंसू। सूचना मिलते ही गोड समाज के जिला पदाधिकारी और सैकड़ों समाजजन मौके पर पहुंचे। आपसी सहमति और समझाइश के बाद मंदिर का ताला तोड़ा गया और घोषणा की गई कि पंचमी के दिन विधिवत दीप प्रज्वलन किया जाएगा।

स्थिति को संवेदनशील देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट रहा। धमधा एसडीओपी डॉ. चित्रा वर्मा और थाना प्रभारी रामनारायण ध्रुव भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। 
पुलिस की मौजूदगी के बीच मंदिर परिसर में भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। महिलाओं और बालिकाओं ने सामूहिक रूप से गौरा-गौरी के पारंपरिक गीत गाए। तालिया की थाप और घंटियों की ध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठा। विवाद के बावजूद आस्था की ज्योति बुझी नहीं बल्कि और तेज होती नजर आई। अब पूरे समाज की निगाहें पंचमी के दिन पर टिकी हैं, जब माता की दीप ज्योति फिर से प्रज्वलित की जाएगी।

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