Edited By meena, Updated: 11 Mar, 2026 05:19 PM

जलते घरों की लपटों में सिर्फ दीवारें नहीं जलीं, किसी का आशियाना, किसी की उम्मीदें और किसी की पूरी जिंदगी राख हो गई...
खंडवा (मुश्ताक मंसूरी) : “जलते घरों की लपटों में सिर्फ दीवारें नहीं जलीं, किसी का आशियाना, किसी की उम्मीदें और किसी की पूरी जिंदगी राख हो गई…” बात मध्य प्रदेश के खंडवा की हो रही है। यहां पंधाना तहसील के ग्राम जामली खुर्द अंतर्गत खापरी गांव के आदिवासी धनतर फालिया में मंगलवार को लगी भीषण आग ने छह आदिवासी परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया। आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते छह कच्चे मकान जलकर राख हो गए और परिवारों की वर्षों की मेहनत पल भर में खत्म हो गई।
पंचनामे के अनुसार आग में घरों का पूरा गृहस्थी का सामान, कपड़े, अनाज और आदिवासी परिवारों की पहनने की चांदी के आभूषण तक जलकर खाक हो गए। आग की चपेट में आने से लगभग बीस के आसपास बकरियां भी जिंदा जल गईं। बताया जा रहा है कि कई बकरियों की हड्डियां तक नहीं बचीं। एक भैंस भी आग में झुलस गई, हालांकि वह जिंदा है लेकिन बुरी तरह घायल बताई जा रही है।
आग लगने के बाद फालिया में चीख-पुकार मच गई। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन घरों में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब सिर्फ राख और मलबा ही बचा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि इन परिवारों के पास अब न पहनने को कपड़े बचे हैं, न रहने को घर और न ही खाने के लिए अनाज।

ग्राम सरपंच ने बताया कि आग की लपटें घरों के पास लगे खेत तक पहुंचने लगी थीं, जहां गेहूं की गरी जमा थी। अगर आग वहां पहुंच जाती तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत ट्रैक्टर से कल्टीवेटर चलाकर गेहूं की गरी के चारों ओर मिट्टी की पट्टी बना दी, जिससे आग आगे नहीं फैल पाई।
सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक छह परिवारों की पूरी गृहस्थी जलकर राख हो चुकी थी। अब इन आदिवासी परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता सिर छिपाने और दो वक्त की रोटी की है।