भ्रष्टाचार की इंतहा! रिश्वत में पैसे नहीं दे पाया तो कर दी 54 हजार के मोबाइल की डिमांड, लोकायुक्त ने दबोचा लेखापाल

Edited By meena, Updated: 26 Feb, 2026 05:16 PM

in katni the accountant demanded a mobile phone worth rs 54 000 as bribe

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले थमने के नाम नहीं ले रहे। रिश्वतखोरी का खेल हर विभाग में जारी है और छोटे से बड़ा अधिकारी इसमें लिप्त है। लोकायुक्त भी ऐसे मामलों में नकेल कसता नजर आता है।

कटनी (संजीव वर्मा) : मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले थमने के नाम नहीं ले रहे। रिश्वतखोरी का खेल हर विभाग में जारी है और छोटे से बड़ा अधिकारी इसमें लिप्त है। लोकायुक्त भी ऐसे मामलों में नकेल कसता नजर आता है। ताजा मामला कटनी जिले से सामने आया है, जहां जिला पंचायत के एक लेखापाल को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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54 हजार रुपये के मोबाइल की मांग, किस्तों में हुआ सौदा

कटनी जिला पंचायत कार्यालय की स्थापना शाखा में पदस्थ लेखापाल सतेन्द्र सोनी पर आरोप है कि उन्होंने बहाली के एवज में 54 हजार रुपये कीमत का मोबाइल रिश्वत के रूप में मांगा। फरियादी आशीष दुबे, जो बडवारा तहसील के निगहरा गांव के निवासी हैं, ने एकमुश्त राशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद किस्तों में भुगतान का सौदा तय हुआ। पहली किस्त 5 हजार रुपये, फरवरी के वेतन के बाद 10 हजार रुपये और शेष राशि बहाली के बाद वेतन मिलने पर देने की बात तय हुई थी। यह सौदा ही बाद में ट्रैप का आधार बना।

लोकायुक्त जबलपुर की कार्रवाई

रिश्वत की मांग से परेशान होकर फरियादी ने जबलपुर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद गुरुवार 26 फरवरी को ट्रैप की योजना बनाई गई। जैसे ही लेखापाल ने जिला पंचायत कार्यालय में 5 हजार रुपये की पहली किस्त स्वीकार की, सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कैमिकल लगे नोट पकड़ने के कारण जब उनके हाथ धुलवाए गए तो वे गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।

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फरियादी का भी रहा है रिश्वत रिकॉर्ड

फरियादी का भी रहा है रिश्वत रिकॉर्ड

इस मामले की एक दिलचस्प कड़ी यह भी है कि शिकायतकर्ता आशीष दुबे खुद भी वर्ष 2023 में एक रिश्वत प्रकरण में सह-आरोपी के रूप में ट्रैप हो चुके हैं। उस समय उन्हें निलंबित कर दिया गया था, हालांकि बाद में हाईकोर्ट से राहत मिलने पर 2025 में उनकी बहाली के आदेश जारी हुए। लेकिन फाइल आगे बढ़ाने के लिए स्थापना शाखा के बाबू सतेंद्र सोनी लेखापाल 54 हजार कीमती विवो का मोबाइल की रिश्वत मांगी गई। आग्रह करने पर किस्तों में पैसे लेने पर बात बनी और उसी की पहली किस्त 5 हजार नगद लेते जबलपुर लोकायुक्त ने गिरफ्तार कर लिया। 

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