Edited By Desh Raj, Updated: 27 Jul, 2026 10:50 PM

दतिया उपचुनाव में प्रचार अंतिम दौर में पहुंच चुका है। भाजपा और कांग्रेस के बीच जबरदस्त मुकाबला देखा जा रहा है, लेकिन दोनों ही पार्टियों के लिए एक बड़ी मुश्किल भी है। दोनों दलों को अंदरूनी गुटबाजी, नाराज समर्थकों के साथ ही जातीय समीकरणों से भी...
(दतिया): दतिया उपचुनाव में प्रचार अंतिम दौर में पहुंच चुका है। भाजपा और कांग्रेस के बीच जबरदस्त मुकाबला देखा जा रहा है, लेकिन दोनों ही पार्टियों के लिए एक बड़ी मुश्किल भी है। दोनों दलों को अंदरूनी गुटबाजी, नाराज समर्थकों के साथ ही जातीय समीकरणों से भी दो-चार होना पड रहा है। सबको पता है कि नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव, कुशवाह वोट बैंक के साथ ही आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी चुनाव के नतीजों में अहम हो सकती है.
दतिया विधानसभा उपचुनाव में वोटिंग 30 जुलाई को है। चुनाव प्रचार आखिरी दौर में पहुंच चुका है, लेकिन इस बार बीजेपी और कांग्रेस के बीच का मुकाबला कहीं और भी घूम रहा है। दोनों ही दलों के लिए बड़ी चुनौती अपने ही नेताओं और समर्थकों की नाराजगी बनी हुई है। चुनावी माहौल में ज्यादा चर्चा संगठन की मजबूती, गुटबाजी और भीतरघात को लेकर बनी हुई है।
इस बार दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को दिया गया है। टिकट कटने के साथ ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का बवाल किसी से छिपा नहीं है। अब पूरा चुनाव नरोत्तम के प्रभाव के आसपास घूम रहा है। भाजपा की चुनावी रैलियों में नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव और मार्गदर्शन को पेश करके बताया जा रहा कि दादा की अगुवाई में ही चुनाव लड़ा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में भी गुटबाजी की चुनौती बनी हुई है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। जिससे पार्टी के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है। वहीं मुकेश नायक का टिकट कटने के बाद हो भी कुछ दिनों तक पार्टी से नाराज थे और बड़े मनाने के बाद वो चुनाव प्रचार में आए हैं।
गौर करने वाली बात है कि यहां सबसे बड़ा वोट बैंक कुशवाह समाज का है, इसके बाद ब्राह्मण, अहिरवार और यादव समाज के मतदाता अपना प्रभाव रखते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कुशवाह वोटों को अपने पक्ष में साधने की कोशिश में है.
आजाद समाज पार्टी बदल सकती है समीकरण
भाजपा औऱ कांग्रेस की इस समस्या के बीच चुनाव में आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव भी समीकरण बदल सकते हैं। जानकारों के अनुसार, अगर आसपा दलित वोट बैंक में सेंध लगाती है तो इसका असर कांग्रेस पर ज्यादा हो सकता है। वैसे भी कांग्रेस आसपा को भाजपा की ही दूसरी टीम बता रही है । लिहाजा ये चुनाव कई वजहों से समीकऱण बदलने वाला और चौंकाने वाला हो सकता है।