Edited By meena, Updated: 24 Mar, 2026 07:15 PM

मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रणनीतिक कदम तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों के प्रदर्शन की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है...
भोपाल: मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रणनीतिक कदम तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों के प्रदर्शन की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। संगठन सृजन अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी चामा वामशीचंद रेड्डी अप्रैल के पहले सप्ताह में भोपाल दौरे पर आएंगे। वे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बैठक लेकर जिला अध्यक्षों के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, पदाधिकारी और सभी जिला अध्यक्ष मौजूद रहेंगे।
राहुल गांधी ने पहले ही दिए थे संकेत
नई दिल्ली में हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को साफ संदेश दिया था कि संगठन की जिम्मेदारी उनके हाथ में है। अच्छा काम करने वालों को आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों की छुट्टी तय है। उन्हें 30 दिन में टीम बनाने और 3 महीने में प्रदर्शन दिखाने का लक्ष्य भी दिया गया था। साथ ही तीन महीने बाद जिला अध्यक्षों का परफॉरमेंस देखने की बात कही गई थी।
6 महीने के प्रदर्शन पर फैसला
कांग्रेस ने 16 अगस्त को 71 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। अब करीब 6-7 महीने बाद उनके काम का आकलन किया जा रहा है। संगठन निर्माण, स्थानीय मुद्दों को उठाने और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सक्रियता को आधार बनाकर मूल्यांकन होगा।
जिला अध्यक्षों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
बैठक के दौरान जिला अध्यक्षों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया जाएगा। जिनका प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन्हें पद से हटाया भी जा सकता है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि “परफॉर्म या बाहर” की नीति अपनाई जा रही है यानी कि खराब परफाॉरमेंस वाले जिलाध्यक्षों की छुट्टी हो सकती है।
2028 चुनाव पर नजर
पार्टी 2028 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से रणनीति बना रही है। कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलाध्यक्षों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना ही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। कुल मिलाकर, आने वाले समय में कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो सीधे तौर पर 2028 की चुनावी तैयारी से जुड़े होंगे।