Edited By meena, Updated: 23 Mar, 2026 12:49 PM

ईरान युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है। घरेलू स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार को तुरंत कदम उठाने पड़े। इसी के तहत LPG सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की
एमपी डेस्क: ईरान युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है। घरेलू स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार को तुरंत कदम उठाने पड़े। इसी के तहत LPG सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालात को संभालने के लिए Essential Commodities Act (ECA) लागू किया गया, जिससे गैस जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और वितरण को नियंत्रित किया जा सके। यह कदम संकेत देता है कि सरकार संकट को गंभीरता से लेते हुए बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
कमर्शियल सिलेंडर कोटा बढ़ाकर 50% किया गया
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23 मार्च से एक बड़ा फैसला लेते हुए कमर्शियल LPG का कोटा 30% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह बढ़ोतरी प्री-क्राइसिस स्तर के मुकाबले है और इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और इंडस्ट्रियल सेक्टर को राहत मिलेगी। लंबे समय से सीमित आपूर्ति के कारण प्रभावित इन क्षेत्रों को अब अपने संचालन को फिर से पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अतिरिक्त आवंटन की जानकारी भी दे दी है।
14.2Kg वाले सिलेंडर में 10 Kg गैस सप्लाई की तैयारी!
खाड़ी देशों से होने वाली गैस सप्लाई में भारी गिरावट के बाद, देश की तेल विपणन कंपनियां एक बेहद चौंकाने वाले विकल्प पर विचार कर रही हैं। Economic Times की खबर के मुताबिक, योजना यह है कि अब आपके घर आने वाले पारंपरिक 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर में पूरी गैस भरने के बजाय, केवल 10 किलो गैस ही भरी जाए। इस 'कटौती' के पीछे का तर्क यह है कि कम गैस बांटकर मौजूदा सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सके, ताकि कोई भी घर पूरी तरह खाली हाथ न रहे। अगर यह फैसला लागू होता है, तो कंपनियों को अपने बॉटलिंग प्लांट में तकनीकी बदलाव करने होंगे। सिलेंडर पर नई मात्रा और बदली हुई कीमतों के स्टिकर लगाए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि 10 किलो गैस भी एक औसत परिवार का काम करीब एक महीने तक चला सकती है। हालांकि, इस फैसले से राजनीतिक विरोध और जनता में भ्रम फैलने का डर भी बना हुआ है, लेकिन सप्लाई की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसे एक 'कड़वी दवा' की तरह देखा जा रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं और प्रवासी मजदूरों को राहत
सरकार ने घरेलू गैस आपूर्ति बनाए रखने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों के उपयोग पर पहले सख्ती बरती थी, लेकिन अब संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे LPG सिलेंडर की रिफिलिंग की सुविधा शुरू की गई है। इसके लिए उपभोक्ताओं को तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह कदम उन लोगों के लिए काफी अहम है, जो अस्थायी रूप से शहरों में रहते हैं और बड़े सिलेंडर लेने में सक्षम नहीं होते।
रिफिलिंग समय सीमा में बदलाव और आगे की चुनौती
गैस संकट को देखते हुए सिलेंडर रिफिलिंग की समयसीमा भी बढ़ा दी गई है—शहरी क्षेत्रों में 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक कर दी गई है। यह बदलाव आपूर्ति दबाव को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो भारत को आगे और कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन अस्थायी उपायों को दीर्घकालिक समाधान में कैसे बदलती है।